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स्लीपर बस में गैंगरेप: एनसीडब्ल्यू ने दिल्ली पुलिस से एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी

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नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। एनसीडब्ल्यू ने उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में चलती स्लीपर बस के अंदर हुए गैंगरेप का स्वतः संज्ञान लिया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।

एक बयान के अनुसार, पुलिस प्रमुख को लिखे पत्र में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि रिपोर्ट में जांच की स्थिति, फोरेंसिक नतीजों, चार्जशीट और निगरानी के उपायों की जानकारी शामिल होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। आयोग जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस मामले पर बारीकी से नजर रखेगा।”

पत्र में रहाटकर ने घटनाओं के पूरे क्रम और राज्यों के बीच तय किए गए रास्ते का पता लगाने के लिए तेजी से जांच और आरोपी से हिरासत में पूछताछ की मांग की। साथ ही, उन्होंने पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सभी लागू प्रावधानों को सख्ती से लागू करने को कहा, जिसमें गंभीर गैंगरेप और आपराधिक धमकी जैसे अपराध शामिल हैं, और जहां जरूरी हो वहां आरोप और गंभीर करने की बात कही।

उन्होंने फोरेंसिक, फिजिकल और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच का भी सुझाव दिया, जिसमें मेडिकल सबूत, जब्त की गई बस, जीपीएस/टेलीमैटिक्स डेटा, सीडीआर और रास्ते के सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं।

एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने पीड़िता और उसके परिवार को पूरी सुरक्षा और सहायता देने का भी निर्देश दिया, जिसमें कानूनी मदद, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और लागू योजनाओं के तहत मुआवजा शामिल है।

बयान के अनुसार, एक अलग मामले में एनसीडब्ल्यू ने ठाणे के शाहपुर में एक आदिवासी आश्रम शाला में किचन हेल्पर द्वारा 22 नाबालिग लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का स्वतः संज्ञान लिया और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी।

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष रहाटकर ने अधिकारियों को पत्र लिखकर तेजी से और व्यापक जांच, पॉक्सो एक्ट और बीएनएस के तहत सख्त कार्रवाई और गंभीर संस्थागत खामियों की जांच की मांग की।

उन्होंने कहा, “ऐसी खबरें बहुत चिंताजनक हैं कि आरोपी को पहले 2024 में इसी तरह के अपराध के लिए पॉक्सो के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे दूसरे संस्थान में तैनात कर दिया गया था। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।”

बयान में कहा गया, “आयोग ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा, और तत्काल मेडिकल, मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता के साथ-साथ पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की है। सात दिनों के भीतर ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ मांगी गई है।”

बयान के अनुसार, एक तीसरे मामले में रहाटकर ने पंजाब के होशियारपुर में एक सरकारी स्कूल के 52 वर्षीय हेडमास्टर द्वारा 11 साल की लड़की के कथित रेप का स्वतः संज्ञान लिया और अधिकारियों से सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।

एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और भलाई की जिम्मेदारी संभालने वाले एक शिक्षक द्वारा कथित अपराध बेहद परेशान करने वाला है और इसके लिए सबसे सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए।”