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गुजरात के मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनों के पीछे ‘सत्ता परिवर्तन’ का एजेंडा होने का आरोप लगाया

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गांधीनगर, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को छात्र कल्याण के नाम पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर ‘सत्ता परिवर्तन’ का एजेंडा चलाने और युवाओं को अराजकता की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा की लगातार चुनावी जीत उसकी विकास नीतियों के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पटेल ने लिखा, “नकाब उतर गया!” और आरोप लगाया कि प्रदर्शनों का असली उद्देश्य न तो छात्र कल्याण था और न ही कोई अन्य मुद्दा, बल्कि ‘सत्ता परिवर्तन’ और “पूरी तरह से अराजकता” फैलाना था।

पटेल ने कहा कि प्रदर्शनों के नाम पर देश के युवाओं को गुमराह करने और भड़काने वालों का असली चेहरा आज बेनकाब हो गया है। उन्हें न तो देश के विकास की चिंता है और न ही युवाओं के भविष्य की।

मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि मतदाताओं ने बार-बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी ‘विकास की राजनीति’ का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि देश एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में नए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने तथाकथित ‘फर्जी आंदोलनकारियों के समूह’ पर युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से विचलित करने और उन्हें अराजकता की ओर धकेलने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

पटेल ने लिखा, ‘भारतीय युवा इस घटिया दुष्प्रचार से कहीं अधिक समझदार हैं!’ और साथ ही यह भी कहा कि जनता घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है और देश की प्रगति में बाधा डालने वालों को कभी माफ नहीं करेगी।

पटेल की ये टिप्पणियां मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आई हैं।

भाजपा ने प्रदर्शन के नेताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को बिना चुनावी जनादेश के गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं पर इसके प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आंदोलन ‘सत्ता परिवर्तन’ की लड़ाई बन गया है, जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आलोचना की।

छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी बांग्लादेश के 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह का उदाहरण देने के बाद आलोचना का सामना करना पड़ा।

भाजपा ने इन टिप्पणियों को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया है कि विरोध प्रदर्शन उनकी घोषित मांगों से कहीं आगे तक फैल गए हैं।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची संशोधन और चुनाव आयोग की आलोचना जारी रखी है।