SGSU Advertisement
Home कानून तेलंगाना हाई कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक, हाइड्रा...

तेलंगाना हाई कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक, हाइड्रा कमिश्नर को राहत

0
2

हैदराबाद, 1 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना हाई कोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) के कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को राहत देते हुए, सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को उन्हें पद से हटाने और उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।

रंगनाथ ने 27 जुलाई को सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी।

यह याचिका एक डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजीव शकधर ने रंगनाथ की ओर से पक्ष रखा।

शुरुआती दलीलें सुनने के बाद बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी।

जस्टिस अनिल कुमार जुकांती ने 27 जुलाई को मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटा दें और उनकी जगह किसी उपयुक्त व्यक्ति को नियुक्त करें।

यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर आया था। कंपनी का आरोप था कि हाइड्रा के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया और 50 गाड़ियों और 200 कर्मचारियों के साथ लोथकुंटा में उनकी 40 एकड़ जमीन में घुस गए।

कोर्ट ने कहा था कि रंगनाथ ‘अपनी मर्जी से काम करने वाले’ बन गए हैं और हाइड्रा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है, साथ ही रेवेन्यू, सिंचाई और जीएचएमसी विभागों को नजरअंदाज कर रहा है।

इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई थी और चेतावनी दी थी कि कोर्ट के आदेशों का बार-बार उल्लंघन करने पर उन्हें सेना की हिरासत में लेकर आर्मी बैरक में रखने का निर्देश दिया जा सकता है।

कमिश्नर को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता की अनुमति के बिना विवादित संपत्ति में हाइड्रा के कर्मचारियों और मशीनरी के घुसने और वहां बाड़ लगाने के लिए स्पष्ट रूप से माफी मांगी जानी थी।

हलफनामा दाखिल नहीं किया गया और अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए, इसलिए जस्टिस जुकांती ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार को रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटाने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने गौर किया कि लगभग डेढ़ साल की अवधि में रंगनाथ के खिलाफ 63 अवमानना ​​याचिकाएं लंबित थीं।

आदेश के बाद रंगनाथ ने कहा कि वह अपने खिलाफ दायर सभी 63 अवमानना ​​मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मामले प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर किए गए थे, जो झीलों और सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए हाइड्रा के अभियान से प्रभावित हुए थे।

रंगनाथ ने आरोप लगाया कि जमीन माफिया और अतिक्रमणकारी गलत जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना मैं 100 प्रतिशत परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हूं और ऐसा करना जारी रखूंगा।” इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के अधिकारी रंगनाथ, दो साल पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एजेंसी हाइड्रा के प्रमुख हैं।

पिछले दो सालों में हाइड्रा का दावा है कि उसने 1.5 लाख करोड़ रुपए की कीमत वाली 3,315 एकड़ सरकारी जमीन बचाई है और कई जल निकायों को बहाल किया है।

एजेंसी ने कहा कि उसने झीलों, नालों, पार्कों, सरकारी जमीनों और ब्लू-ग्रीन संसाधनों को वापस हासिल किया और उनकी सुरक्षा की।

हाइड्रा के कामकाज की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। उन्होंने एजेंसी पर सरकारी जमीन पर बने गरीबों के घरों को बुलडोजर से गिराने का आरोप लगाया है।