नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के उस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें नीट-यूजी परीक्षा को रद्द करने और लगभग 22 लाख उम्मीदवारों के लिए देशभर में दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया था।
जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के सामने मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने की बात रखी गई, तो कहा गया कि याचिका में 3 मई की परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने पर सवाल उठाया गया है और उन लाखों उम्मीदवारों के लिए राहत मांगी गई है जिनका कथित पेपर लीक से कोई लेनादेना नहीं था।
हालांकि, सीजेआई ने तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नीट यूजी 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही है। नीट से जुड़े मामलों पर दूसरी बेंच विचार कर रही है और मौजूदा याचिका को भी जुलाई में उसी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में एनटीए के उस फैसले पर सवाल उठाया गया है, जिसके तहत 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा को रद्द कर दिया गया और पेपर लीक व परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया।
याचिका के अनुसार, हालांकि परीक्षा में धोखाधड़ी के आरोपों की सख्त जांच और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन “परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की अपनी संस्थागत और प्रशासनिक नाकामियों की वजह से लाखों असली उम्मीदवारों के संवैधानिक अधिकारों और जायज हितों की बलि नहीं दी जा सकती।”
याचिका के मुताबिक, सीबीआई की जांच से अब तक यह पता चला है कि गड़बड़ी कुछ खास संगठित नेटवर्क के जरिए स्थानीय स्तर पर हुई थी, न कि पूरे देश में परीक्षा की प्रक्रिया ही दूषित हो गई थी।
परीक्षा रद्द करने के फैसले का ज़िक्र करते हुए याचिका में कहा गया कि एनटीए ने “लगभग 22 लाख छात्रों का कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं था, और उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा की मुश्किलों से गुजरने के लिए मजबूर किया।”
आगे कहा गया कि इस फैसले से लाखों छात्रों को भारी शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी हुई और देश भर में मेडिकल एडमिशन की पूरी प्रक्रिया में रुकावट आई।
दोबारा परीक्षा को चुनौती देने के अलावा, पीआईएल में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में संस्थागत, ढांचागत और तकनीकी सुधारों की मांग की गई है। इनमें स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था, बेहतर सुरक्षा उपाय और टेक्नोलॉजी पर आधारित परीक्षा प्रणालियों की ओर बढ़ना शामिल है, जिसमें एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न डिलीवरी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और एआई-आधारित निगरानी जैसी तकनीकें हों।
इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को 21 जून की दोबारा परीक्षा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि ऐसे समय में ऐसा निर्देश नहीं दिया जा सकता जब अधिकारी पहले से ही नई परीक्षा कराने की तैयारी में जुटे हों। कोर्ट ने इस मामले को जुलाई में सुनवाई के लिए एनटीए के कामकाज में सुधार की मांग करने वाली अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया। री-टेस्ट 21 जून को उसी पेन और पेपर फार्मेट में होगा, जिसके लिए एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
इस बीच, एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने मंगलवार को उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया कि री-एग्जामिनेशन सुरक्षित और बिना किसी गड़बड़ी के कराया जाएगा। साथ ही, उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को सोशल मीडिया पर चल रहे उन रैकेट से सावधान रहने को कहा जो मोटी रकम लेकर “लीक हुए पेपर” बेचने का दावा करते हैं।
एक वीडियो मैसेज में सिंह ने कहा कि “री-एग्जाम के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है” और उम्मीदवारों को टेलीग्राम चैनलों के जरिए धोखाधड़ी करने वालों के झांसे में न आने की चेतावनी दी। एनटीए प्रमुख ने यह भी बताया कि इंडियन एयर फोर्स लॉजिस्टिक्स में मदद कर रही है ताकि क्वेश्चन पेपर को सुरक्षित रूप से लाने-ले जाने में लगने वाले समय को कम किया जा सके और मूल परीक्षा रद्द होने के 37 दिनों के भीतर री-टेस्ट को सुचारू रूप से कराया जा सके।


