Monday, July 13, 2026
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सुप्रीम कोर्ट आज राम मंदिर ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर करेगा सुनवाई

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नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को जनहित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के मैनेजमेंट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कॉज-लिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच सोमवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

इन मामलों में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर की गई एक रिट याचिका, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ दायर एक क्रिमिनल रिट याचिका और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की एक अलग याचिका शामिल है।

इससे पहले, जब जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और शील नागू की बेंच के सामने गोस्वामी की याचिका का जिक्र किया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तुरंत सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मामले को तुरंत लिस्ट करने पर जोर दिया था और कहा था कि लगाए गए आरोप “बहुत गंभीर” हैं।

मामले की तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद शीर्ष अदालत के फिर से खुलने पर इस मामले को सूचीबद्ध किया जाए।

गोस्वामी की याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में किए गए दान से संबंधित अभिलेखों और साक्ष्यों के संरक्षण और मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाने के निर्देश मांगे गए हैं।

याचिका के अनुसार, सार्वजनिक मंदिर में किसी देवता को चढ़ाया गया चढ़ावा “पवित्र न्यास संपत्ति” है, जो एक कानूनी इकाई के रूप में देवता में निहित होती है और ऐसे चढ़ावे का प्रबंधन करने वाले व्यक्ति पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के कर्तव्यों से बंधे न्यासी होते हैं।

याचिका में मंदिर में दान और चढ़ावे से संबंधित सभी अभिलेखों, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तत्काल संरक्षित करने की मांग की गई है। साथ ही चल रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच की एक सीलबंद स्थिति रिपोर्ट और ट्रस्ट की स्थापना के बाद से प्राप्त सभी दान, चढ़ावे और मूल्यवान वस्तुओं का एक स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की गई थी कि वह राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में जनता से मिलने वाले दान और चढ़ावे को पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए कम से कम संवैधानिक सुरक्षा उपाय बनाने का निर्देश दे।

हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह मामला तब सामने आया जब सार्वजनिक रिपोर्टों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच से कथित तौर पर मंदिर में दान में अनियमितताओं, गबन और गलत तरीके से प्रबंधन का पता चला।

इस बीच, सांसद सुधाकर सिंह ने चल रही जांच को सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को सौंपने की मांग की है। उनकी याचिका में ट्रस्ट के धर्मनिरपेक्ष वित्तीय मामलों की देखरेख के लिए रिटायर न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों की एक अस्थायी, कोर्ट की निगरानी वाली समिति बनाने, सभी वित्तीय रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, जांच पूरी होने तक बड़े वित्तीय फैसलों पर रोक लगाने, व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने और ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय स्टेटमेंट और दान का विवरण प्रकाशित करने की भी मांग की गई है।