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राजस्थान: झालावाड़ में सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट से छह नाबालिग लड़कियों को बचाया गया, पांच गिरफ्तार

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झालावाड़, 6 नवंबर (आईएएनएस)। नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के एक चौंकाने वाले मामले में राजस्थान पुलिस ने झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छह नाबालिग लड़कियों को बचाया है और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पीड़ितों के रिश्तेदार या करीबी हैं।

पुलिस जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि बचाई गई लड़कियों में से पांच का बार-बार यौन शोषण किया गया था, जबकि दो लड़कियां यौन संचारित रोगों (एसटीडी) से भी पीड़ित पाई गईं।

झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया ने बताया कि 7 अक्टूबर को मिली एक गुप्त शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। इन आरोपों की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष श्रोत्रिय की देखरेख में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

पुलिस ने एक गुप्त अभियान चलाया और जासूसी कैमरों का इस्तेमाल करके डिजिटल सबूत जुटाए। सबूतों की पुष्टि होने के बाद 3 नवंबर को 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की एक टीम ने चिन्हित स्थानों पर एक साथ छापेमारी की और छह नाबालिग लड़कियों को बचाया।

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चला है कि इन लड़कियों को ग्राहकों के सामने पेश किया जाता था और अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के बदले पैसे लिए जाते थे।

अभियान के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज से बिचौलियों और परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता के बारे में अहम सबूत मिले हैं।

मेडिकल जांच में पांच लड़कियों के बार-बार यौन शोषण की पुष्टि हुई है। उनमें से दो लड़कियों में यौन संचारित रोग (एसटीडी) भी पाए गए, जिनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किया जा रहा है।

पुलिस ने पांचों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस ने ‘इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट (अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम) और ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस’ (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इस पूरे नेटवर्क की जांच करने और इसमें शामिल अन्य लोगों, जिनमें दलाल और ग्राहक भी शामिल हैं, की पहचान करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया है।

बाल कल्याण समिति के आदेश पर, बचाई गई सभी छह लड़कियों को सुरक्षित आश्रय के लिए एक बाल गृह (चिल्ड्रन होम) में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।