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मराठी को ज्ञान की भाषा बनाएंगे: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

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मुंबई, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि मराठी सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह समृद्ध संस्कृति की वाहक और गौरवशाली इतिहास की साक्षी भी है।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विशाल शब्दावली, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और विविध बोलियों से संपन्न मराठी भाषा 21वीं सदी में डिजिटल भाषा और ज्ञान की भाषा के रूप में और अधिक सशक्त होगी।

मराठी के रोजमर्रा के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी इसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया।

मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सप्ताह’ और ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सम्मान दिवस’ ​​की शुरुआत के अवसर पर बोल रहे थे।

यह बताते हुए कि मराठी मूल रूप से प्राचीन और शास्त्रीय भाषा है, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार से शास्त्रीय भाषा के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलना सभी मराठी भाषियों के लिए गर्व का क्षण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिली है।

लोगों को इतिहास की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य के विजन के साथ-साथ अपनी भाषा पर भी जोर दिया था। उन्होंने राज्य प्रशासन में मराठी को बढ़ावा देने और शासन-व्यवस्था में इसके इस्तेमाल को नई दिशा देने के लिए प्रयास किए थे।

यह बताते हुए कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में मराठी 13वें स्थान पर है, मुख्यमंत्री ने इसके वैश्विक स्वरूप पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि 20वीं सदी में तैयार किए गए मराठी विश्वकोश (ज्ञानकोश) और शब्दरत्नाकर में 11 लाख से 13 लाख के बीच शब्द शामिल थे।

उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में लगभग 6,00,000 शब्द हैं, जबकि मैंडरिन, स्पैनिश और फेंच जैसी भाषाओं में लगभग 3,00,000 से 3,50,000 शब्द हैं।

राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित आधिकारिक मराठी शब्दकोश में अभी लगभग 3,00,000 शब्द हैं, और मुख्यमंत्री ने इसके शब्द-भंडार को बढ़ाकर 13 लाख (1.3 मिलियन) शब्द करने के लिए अगले संस्करणों पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

मराठी के समृद्ध शब्द-भंडार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी विश्वकोशीय और शब्दकोशीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।

अलग-अलग शब्दकोशों में दर्ज लाखों शब्द मराठी की गहरी भाषाई विरासत को दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह शब्द-भंडार सिर्फ गर्व का विषय नहीं रहना चाहिए, बल्कि आधुनिक ज्ञान-निर्माण में इसका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, अर्थशास्त्र, शिक्षा और शोध से जुड़े कॉन्सेप्ट्स को मराठी में उपलब्ध कराने से यह सचमुच ज्ञान की भाषा बन जाएगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डिजिटल तकनीक की वजह से बातचीत के माध्यम तेजी से बदल रहे हैं।

ऐसे माहौल में मराठी को पारंपरिक इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि नई तकनीक के साथ जोड़ना चाहिए।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भाषा की प्रभावी मौजूदगी बढ़ाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी और ज्ञान के संसाधन उपलब्ध कराने, और ओटीटी प्लेटफॉर्म व सोशल मीडिया पर उच्च-गुणवत्ता वाला मराठी कंटेंट बनाने के लिए ‘मराठी एआई’ का इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने भरोसा जताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में ज्ञान के संसाधन उपलब्ध कराने से युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा में आधुनिक ज्ञान को अपना सकेगी।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी सिर्फ महाराष्ट्र की पहचान नहीं, बल्कि उसका आत्म-सम्मान भी है।

उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक की समृद्ध विरासत से सजी मराठी भाषा अब समुद्र पार कर चुकी है और दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में मराठी के वैश्विक विस्तार को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भाषा से जोड़ने के लिए डिजिटल मीडिया, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, गेमिंग और कोडिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में मराठी के इस्तेमाल को बढ़ाना जरूरी है। मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसके सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी पहल शुरू की गई हैं।

उन्होंने बताया कि पुणे की डेक्कन यूनिवर्सिटी में मराठी के लिए एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, लंदन में छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर एक ‘ग्लोबल मराठी सेंटर’, राज्य भर की विभिन्न क्षेत्रीय बोलियों के लिए 100 शब्दकोश और नौ ‘मराठी कौशल विकास केंद्र’ स्थापित करने का काम चल रहा है।