नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के दूसरे दिन शुक्रवार को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र तेजी से विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उनका कहना है कि सरकार की नीतियां, प्रोत्साहन योजनाएं और बढ़ती वैश्विक रुचि भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण और तकनीकी नवाचार के प्रमुख केंद्रों में शामिल कर सकती हैं।
ऐडवर्ब के सह-संस्थापक और सीईओ संगीत कुमार ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उनकी कंपनी पूरी तरह भारत-आधारित है और नोएडा में उसके दो विनिर्माण संयंत्र हैं। उन्होंने कहा कि ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में कंपनी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विकसित नवीनतम ऑटोमेशन और रोबोटिक्स समाधान प्रदर्शित कर रही है, जिनमें रील स्टोरेज सिस्टम, ऑटोमैटिक स्टोरेज एवं रिट्रीवल सिस्टम, एफओयूपी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट तथा असेंबली लाइन के लिए विकसित छोटे रोबोट शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा, “सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के कारण अगले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी। शुरुआती दौर में तकनीक का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आएगा, लेकिन धीरे-धीरे भारत अपनी स्वदेशी तकनीक भी विकसित करेगा।”
इसके साथ ही, होरिबा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष राजीव गौतम ने आईएएनएस से कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहलों और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत के साथ गति पकड़ने लगी। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में मुख्य फोकस केवल विनिर्माण इकाइयों पर था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि केवल फैक्ट्री स्थापित करना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कच्चे माल, गैस, उपकरण, सप्लाई चेन और प्रशिक्षित प्रतिभाओं सहित पूरे इकोसिस्टम की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा, “होरिबा पिछले 73 वर्षों से जापान में इस उद्योग का हिस्सा रही है और भारत में भी इस संपूर्ण इकोसिस्टम को विकसित करने की दिशा में योगदान दे रही है।”
वहीं, आज्ञाविजन की सीईओ सुचिस्मिता बनर्जी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जब देश का नेतृत्व किसी क्षेत्र के विकास की बात करता है और युवाओं को उसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे उद्योग पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और अधिक लोगों को इससे जोड़ने की बात करने से युवाओं और उद्यमियों के बीच नया उत्साह पैदा हुआ है। इससे भविष्य में अधिक प्रतिभाएं इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगी।
डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया में विभागाध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति उम्मीदों से कहीं अधिक तेज रही है। उन्होंने कहा कि उद्योग में काम कर रहे लोगों का मनोबल बेहद ऊंचा है क्योंकि देश ने बहुत कम समय में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है।
उन्होंने कहा कि दुनिया लंबे समय से भारत को संभावनाओं वाले देश के रूप में देखती रही है और अब वही क्षमता तकनीक और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी दिखाई देने लगी है। उनके अनुसार, भारतीय प्रतिभा और तकनीकी क्षमता इस क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकती है।
सेलेस्टा कैपिटल के फाउंडिंग मैनेजिंग पार्टनर श्रीराम विश्वनाथन ने आईएएनएस से कहा कि सरकार सही दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन अब कुछ महत्वपूर्ण बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “नियमन, कराधान और प्रोत्साहन से जुड़े मुद्दों को सरल बनाने के साथ-साथ घरेलू खरीद और स्थानीय बाजार निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। भारतीय कंपनियों को ऐसा मजबूत घरेलू बाजार मिलना चाहिए जहां वे अपने उत्पाद बेच सकें। इससे उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।”
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) और सेमी इंडिया के अध्यक्ष एवं सीईओ अशोक के. चंदक ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया के दौरान विभिन्न देशों के साथ आयोजित राउंडटेबल बैठकों में बेहद सार्थक चर्चा हो रही है।
उन्होंने कहा कि भारत अभी सेमीकंडक्टर विनिर्माण तकनीकों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है और उसे वैश्विक साझेदारों से सहयोग एवं विशेषज्ञता प्राप्त करनी होगी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और तकनीकी सहयोग भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
