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‘झारखंड की राजनीति का एक हीरा हमसे बिछड़ गया,’ सुदिव्य कुमार के निधन पर भावुक हुए राधाकृष्ण किशोर

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रांची, 6 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन की खबर ने झारखंड की राजनीति को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके निधन पर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी भावुक नजर आए।

उन्होंने सुदिव्य कुमार सोनू के साथ अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए आईएएनएस को बताया, “मैं उनसे परसों ही मिला था और हमारी लगभग आधे घंटे तक बात हुई थी। आज, मैं आपके कैमरों के सामने उनके अचानक निधन पर अपना दुख व्यक्त कर रहा हूं। यह कैसी किस्मत है? राजनीति और समाज के लिए एक अहम व्यक्ति हमें इतनी जल्दी छोड़कर चला गया।”

राधाकृष्ण किशोर ने कहा, “वे पहली बार कैबिनेट में शामिल हुए थे। हालांकि, विधानसभा के अंदर उठाए गए किसी भी सवाल या मुद्दे पर उनका जवाब देने का तरीका बहुत बढ़िया था। उनके जवाब सटीक, तार्किक और ठोस होते थे। बहुत कम लोगों के पास ऐसी व्यापक जानकारी और ये गुण होते हैं। वे मृदुभाषी और मिलनसार थे।”

राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, कोई व्यक्ति किसी काम के सिलसिले में उनके पास जाता था तो जो काम संभव होता था, उसे वह करने की कोशिश करते थे और जो संभव नहीं होता था, उसे भी साफ शब्दों में बता देते थे। वह बात को घुमाने के बजाय स्पष्ट जवाब देने में विश्वास रखते थे।

अपनी आखिरी मुलाकात का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उस दौरान पलामू के एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किले के जीर्णोद्धार को लेकर भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया कि किले की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले करीब एक साल से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। सुदिव्य कुमार सोनू ने उन्हें बताया था कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है और जल्द ही टेंडर निकालकर जीर्णोद्धार का काम शुरू किया जाएगा।

राधाकृष्ण किशोर ने एक और घटना साझा करते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में एक डिग्री कॉलेज की स्थापना का विषय भी सुदिव्य के सामने था। उन्हें लगा था कि मुलाकात के दौरान वह इस मुद्दे के बारे में जरूर पूछेंगे। जब वह उनके कार्यालय पहुंचे तो संबंधित कागजात पहले से ही उनकी टेबल पर रखे हुए थे।

उन्होंने बताया कि उन्होंने सुदिव्य से पूछा कि आखिर उन्हें कैसे पता चला कि वह डिग्री कॉलेज के बारे में जरूर पूछेंगे। इस पर सुदिव्य ने कहा कि आपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में कॉलेज की स्थापना को लेकर मुझे पत्र दिया था, इसलिए मुझे मालूम था कि आप इसके बारे में जरूर जानना चाहेंगे। इसलिए मैंने पहले से ही संबंधित कागजात निकालकर रख लिए थे। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सुदिव्य की इस कार्यशैली को देखकर वह खुद भी अवाक रह गए थे।

वित्त मंत्री ने कहा कि रविवार सुबह जब उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि सुदिव्य कुमार सोनू नहीं रहे और उनके बेटे ने भी फोन पर इसकी जानकारी दी, तो उन्हें इस खबर पर विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिस व्यक्ति से अभी दो दिन पहले आधे घंटे तक बातचीत हुई हो, उसके इतनी जल्दी चले जाने की कल्पना करना भी मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि सुदिव्य के जाने से न सिर्फ उनके दल को नुकसान हुआ है बल्कि पूरा सदन जैसे सूना हो गया है। झारखंड की राजनीति में आने वाले वर्षों में शायद ही कोई उनकी कमी पूरी कर पाए। उन्होंने सुदिव्य को झारखंड की राजनीति का ‘एक हीरा’ और ‘सितारा’ बताते हुए कहा कि उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि राजनीतिक जीवन में सरकार को कई तरह की परेशानियों और सवालों का सामना करना पड़ता है लेकिन सुदिव्य जिस सहजता से विषयों को संभालते थे, वह उनकी बड़ी खूबी थी। उनके सरल स्वभाव के कारण बातचीत का माहौल भी सहज बना रहता था। राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, उनके तर्क इतने स्पष्ट और मजबूत होते थे कि विपक्ष के पास भी उनकी बात को काटने की ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती थी।

सुदिव्य के निधन पर शोक जताते हुए राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वह कुछ ही देर में गिरिडीह के लिए रवाना होंगे, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाना है। उन्होंने कहा कि अब सुदिव्य जी के लिए श्रद्धांजलि के ये शब्द बोलने पड़ रहे हैं, यह बेहद दुखद और पीड़ादायक है।

उन्होंने बताया कि सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनकी पार्टी ने अपने कई कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। संगठन की ओर से अगले दिन प्रस्तावित आंदोलन का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है और पार्टी के नेता-कार्यकर्ता अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गिरिडीह रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति में मानवता की भावना होनी चाहिए और दुख की इस घड़ी में राजनीतिक कार्यक्रमों से ज्यादा जरूरी दिवंगत नेता को अंतिम विदाई देना है।

राधाकृष्ण किशोर ने सुदिव्य कुमार सोनू के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि ईश्वर उनके परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दे और दिवंगत आत्मा को सुख-शांति प्रदान करे। उन्होंने कहा कि सुदिव्य का जाना सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि झारखंड की राजनीति ने अपना एक ऐसा नेता खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।