भोपाल, 19 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा कि राज्य में जनजातीय वर्ग के जीवन में बड़ा बदलाव आ रहा है और यह वर्ग मुख्य धारा से जुड़ रहा है।
राजधानी के आदि भवन में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत जनजाति विकास अवधारणा पर आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज की पीड़ा को समझा और विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनश्चित करने के लिए प्रभावी नीतियां बनायी हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष जैसी पहल से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस कार्य हो रहे हैं।
मंत्री विजय शाह ने कहा कि वे वर्ष 1990 से लगातार जनजातीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जनजातीय समाज के साथ लगातार कार्य किया है। विभागीय अधिकारी भी सतत रूप से गांवों में और वनवासी अंचल के बीच जाएं और उनके जीवन को नजदीक से देखें। साथ ही प्रत्यक्ष अनुभव से जो परिस्थितियां सामने आती है उसे समझें और उसके अनुरूप कार्य करें।
उन्होंने कहा कि जनजाति वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को उनके द्वार तक पहुंचाने के लिए ‘जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ जनजाति वर्ग के ग्रामीणों को दिलाया जाएगा।
मंत्री विजय शाह ने वनवासी अंचल में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में हो रहे कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि साल 1990 के दशक से लेकर अब तक स्थितियां बदल गयी है। आज जनजातीय समाज, विकास की मुख्यधारा में शामिल हैं।
मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बॉटल वितरित कर रहे हैं। साथ ही पहली से 12वीं कक्षा तक के 45 हजार बच्चों को पेयजल के लिए पानी की बॉटल प्रदान की हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में वॉटर कूलर और आरओ लगाया हैं। इससे हर गांव, हर स्कूल में शुद्ध पेयजल सुलभ होगा।
उन्होंने कहा कि जनजाति अंचल की बच्चियां शहर के कॉलेज जाने में हिचकिचाती हैं और सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा छोड़ भी देती है। ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने प्रायोगिक तौर पर अपने क्षेत्र में 4 बसें संचालित की, जिससे कॉलेज जाने वाली बालिकाओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने कहा कि इस सुविधा का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार होना चाहिए। कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने विभागीय योजनाओं का जिक्र किया। कार्यशाला में आजीविका तथा रोजगार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग पर मैनिट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संयम शुक्ला ने अपना संबोधन दिया। सतत जनजातीय विकास में जीआईएस तथा उपग्रह सुदूर संवेदन विषय पर आईआईएसईआर के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने भी संबोधित किया।

