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‘शौक है तो चले जाओ इस्लामाबाद’, मणिशंकर अय्यर के बयान पर भड़के आनंद दुबे

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नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान ‘भारत के पास सर्जिकल स्ट्राइक का साहस है, लेकिन बातचीत की मेज पर बैठने की हिम्मत नहीं’ ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बातचीत का रास्ता भी अपनाने का समर्थन किया है।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जो जिस भाषा में समझता है, उसे उसी भाषा में समझाना पड़ता है। पाकिस्तान बातचीत की भाषा समझने वाला देश नहीं है। पाकिस्तान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भाषा समझता है, उसे हमले की भाषा समझ आती है और करारा जवाब की ही भाषा समझ आती है। भारतीय सेना ने अपनी ताकत की छोटी सी झलक दिखाई तो कई लोग 72 हूरों के पास पहुंच गए।

मणिशंकर अय्यर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान से बातचीत करने का इतना ही शौक है तो उन्हें किसने रोका है? वे इस्लामाबाद चले जाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को तो तुरंत वीजा भी मिल जाता है, क्योंकि वे वहां के दोस्त हैं।

शिवसेना नेता ने स्पष्ट कहा कि हमारा देश अब पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेगा, क्योंकि बातचीत के सारे अवसर पाकिस्तान ने खुद ही बंद कर दिए हैं। अब पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है और जिस दिन सेना को लगेगा कि कार्रवाई करनी है, उस दिन वह पाकिस्तान के चिथड़े-चिथड़े उड़ा देगी।

दूसरी ओर इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता शक्ति सिंह यादव ने अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि देश पर अगर कोई आतंकी घटना होती है या कोई आतंकी कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो निश्चित तौर पर उसके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक भी होगी और कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

उन्होंने इसके साथ ही कहा कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। विदेश नीति को और अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है और हर देश के साथ कूटनीति जारी रहनी चाहिए। बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं होते।

शक्ति सिंह यादव ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध होने चाहिए। देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए जो भी खतरा है, उन सभी सवालों का हल बातचीत के जरिए भी निकाला जाना चाहिए।