नासिक टीसीएस केस: आरोपियों की पुलिस कस्टडी 5 मई तक बढ़ी

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नासिक, 2 मई (आईएएनएस)। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज बहुचर्चित टीसीएस केस में शनिवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी आरोपियों की पुलिस कस्टडी 5 मई तक बढ़ाने का आदेश दिया है।

इस प्रकरण में चार आरोपी तौसीफ बिलाल अत्तार (37), दानिश एजाज शेख (32), शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी (34) और रजा रफीक मेमन (35) को पहले 23 अप्रैल को नासिक रोड सेंट्रल जेल से कस्टडी में लिया गया था। इससे पहले कोर्ट ने आरोपियों को 29 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा था, जिसे बाद में 2 मई तक बढ़ाया गया। शनिवार को पुनः पेशी के दौरान पुलिस की मांग पर कस्टडी 5 मई तक बढ़ा दी गई।

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी वकील अजय मिसर ने दलील दी कि मामले की जांच अभी अधूरी है। अब तक कुल 7 पंचनामा किए जा चुके हैं और आरोपियों के मोबाइल जब्त किए गए हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच बाकी है। इसी आधार पर पुलिस ने 5 दिन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग की थी।

वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों उमेश वालझाडे और अन्य ने पुलिस कस्टडी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि घटना वर्ष 2022 की बताई जा रही है, जबकि केस 2026 में दर्ज हुआ, जिससे देरी पर सवाल उठते हैं। आरोपियों के खिलाफ पहले कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। सभी जांच प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं, ऐसे में पुलिस कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।

आरोपियों को पहले से ही 2 अप्रैल से कस्टडी में रखा गया है और एक ही जांच अधिकारी द्वारा जांच की जा रही है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले में “कन्वर्जन” या अन्य गंभीर आरोपों को लेकर पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

इस पर सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि चारों आरोपियों के अलग-अलग अपराध हैं और मामले की जांच अभी जारी है। कुछ अहम साक्ष्य, जैसे कथित रूप से इस्तेमाल की गई दवा के स्रोत और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच अभी बाकी है, जिसके लिए पुलिस कस्टडी आवश्यक है। अब इस मामले में आगे की जांच के लिए पुलिस को 5 मई तक का समय दिया गया है, जिसके बाद आरोपियों को पुनः कोर्ट में पेश किया जाएगा।

बता दें कि नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय महिला कर्मचारियों ने कई पुरुष टीम लीडर्स और साथियों पर शारीरिक शोषण, अनुचित व्यवहार और शादी का झांसा देकर रेप करने के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि एक सुनियोजित समूह द्वारा हिंदू महिला कर्मचारियों को बुर्का/हिजाब पहनने, कलमा पढ़ने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था।