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नसीरुद्दीन शाह पर बरसे संजय निरूपम, कांग्रेस की 1 नवंबर की रैली और जामिया प्रकरण पर भी उठाए सवाल

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मुंबई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरूपम ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की हालिया राजनीतिक टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह पर भाजपा विरोध के बहाने देशविरोधी माहौल बनाने का आरोप लगाया और उन्हें एक कलाकार की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी। इसके साथ ही निरूपम ने कांग्रेस की 1 नवंबर को प्रस्तावित रामलीला मैदान रैली, 1984 के सिख विरोधी दंगों और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरूपम ने कहा, “नसीरुद्दीन शाह को बतौर फिल्म अभिनेता इस देश के करोड़ों लोग पसंद करते हैं, लेकिन अचानक बुढ़ापे में उनके अंदर का अभिनेता बाहर निकल गया है और उसमें एक सियासी आदमी, एक जिहादी और कट्टरपंथी मुसलमान पैदा हो गया है। जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ और भाजपा की आड़ में भारत के खिलाफ, देश की एकता और अखंडता के खिलाफ वह अभियान चला रहे हैं, वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं, वो सठिया गए हैं, लेकिन सठियाने के साथ-साथ वह भारत-विरोधी न हो जाएं, भारत-द्रोही न हो जाएं। अपने राजनीतिक विचारों के प्रभाव में आकर, कम्युनिस्टों के प्रभाव में आकर, वह भाजपा का विरोध करते-करते भारत देश के खिलाफ न चले जाएं। मुझे इस बात का डर लग रहा है।”

उन्होंने कहा कि उनसे मेरा निवेदन होगा कि वह एक कलाकार हैं। कलाकार की एक गरिमा होती है। कलाकार की एक प्रतिष्ठा होती है। उस गरिमा और प्रतिष्ठा की रक्षा करने की जिम्मेदारी उस कलाकार की भी होती है। इसलिए आप अपने कलाकार होने के महत्व को कम मत कीजिए। अनावश्यक रूप से राजकीय और राजनीतिक विषयों में अपने विचार रखकर ऐसा न करें।

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के विरोध के नाम पर कांग्रेस ने आने वाले 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक विरोध प्रदर्शन के लिए रैली आयोजित की है। विपक्ष को सरकार की नीतियों और सरकार के कार्यक्रमों का विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन पहला आपत्ति वहां के व्यापारियों ने उठाई कि पिछले एक-दो महीनों से दिल्ली में कांग्रेस ने और बाकी तमाम विपक्षी दलों ने जो अव्यवस्था पैदा कर रखी है, उसकी वजह से पूरी दिल्ली की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। दुकानदारों को भयंकर नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जब त्योहारों का मौसम चल रहा है, तब ठीक 1 नवंबर को दिवाली से पहले इस प्रकार का आंदोलन करना मतलब दिल्ली के दुकानदारों के पेट पर लात मारना है। अब यह सब चल ही रहा था। इसी बीच 1 नवंबर को लेकर कांग्रेस को एक और बात याद दिलाई गई कि 1 नवंबर वह दिन है जब दिल्ली में सिखों का कत्लेआम किया गया था। कत्लेआम करने वाले कौन थे? यही कांग्रेसी थे।

संजय निरूपम ने कहा कि उनमें से कुछ लोग तो जेल भी गए थे। 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिख उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। उसके बाद कांग्रेस के लोग सड़कों पर उतर गए थे और सिख समाज के ऊपर भयंकर हमला बोला था। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी। 1 नवंबर उस काले दिन के तौर पर पूरे दिल्ली का सिख समाज याद रखता है।

उन्होंने कहा कि तो क्या कांग्रेस पार्टी सिखों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए 1 नवंबर की तारीख चुन रही है? कांग्रेस से यह सच्चा प्रश्न है। कांग्रेस, जिसके दामन पर सिख समाज के खून के धब्बे लगे हुए हैं, क्या वह एक बार फिर सिख समाज को प्रताड़ित करने, उन्हें कुरेदने, उन्हें सताने और उनके जख्मों को हरा करने के लिए रामलीला मैदान, दिल्ली में एक प्रदर्शन का आयोजन कर रही है?

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया देश का एक बहुत ही प्रतिष्ठित संस्थान रहा है। इसकी स्थापना भारत के राष्ट्रवादी मुस्लिम विद्वानों ने की थी। उनमें प्रमुख भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन रहे हैं। पूरे हिंदुस्तान के बच्चे वहां आते हैं, पढ़ते हैं। उन्हें हर तरह की ट्रेनिंग दी जाती है, पढ़ाई कराई जाती है। यह उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है, लेकिन हाल के वर्षों में यह पूरा संस्थान जिहादियों का अड्डा बनता दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि पूरे संस्थान में छात्रों के रूप में छात्रों की शक्ल में ऐसा लगता है कि भारत-विरोधी तत्व घुस गए हैं। जिस तरीके से जामिया मिल्लिया की दीवारों पर कश्मीर की आजादी के नारे लिखे गए। उपद्रवी शरजील इमाम की रिहाई के लिए जिस तरीके से वहां नारे लिखे गए, उन नारों को देखते हुए समझ में आता है कि अब यह संस्थान शैक्षणिक संस्थान कम और सियासत का अड्डा ज्यादा हो गया है।

संजय निरूपम ने कहा कि भारत को याद है कि जब एनआरसी और सीएए जैसी योजनाएं सरकार लेकर आई थी, तो उसके विरोध में सबसे बड़ा आंदोलन सबसे पहले जामिया मिल्लिया से शुरू हुआ था। वहां के मुस्लिम छात्रों ने इस मुद्दे पर हंगामा किया था। यानी आने वाले दिनों में सरकार को, दिल्ली पुलिस को, इस पूरे संस्थान पर कड़ी निगरानी रखनी पड़ेगी। यहां पाकिस्तान-परस्त कितने हैं, आईएसआई का कोई संबंध है क्या, जिहादियों का जो अड्डा बनता चला जा रहा है, कट्टरपंथियों का जो अड्डा बनता जा रहा है, वह आने वाले दिनों में धीरे-धीरे एक मिनी पाकिस्तान का स्वरूप लेगा।

उन्होंने कहा कि यहां बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। उन्हें पढ़ाई करनी चाहिए और जिनको सियासत में रुचि है, उन्हें कैंपस से बाहर निकाल देना चाहिए, ताकि यह संस्थान अपने पुराने वैभव के साथ बच सके।