नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देते हुए इसे पश्चिम बंगाल के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर सुवेंदु अधिकारी को बधाई। उन्होंने एक ऐसे नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जो लोगों से गहराई से जुड़े रहे हैं और उनकी आकांक्षाओं को बहुत करीब से समझा है। उनके आगामी कार्यकाल के सफल होने के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।’
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘पोचिशे बोइशाख’ के पावन अवसर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को याद करना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने टैगोर को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महान प्रतीक बताया।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बंगाल आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नई लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का संगम हो रहा है। बंगाल ने देश को कई महान चिंतक, समाज सुधारक, लेखक, कलाकार और राष्ट्रवादी नेता दिए हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव मजबूत की। उन्होंने ‘सोनार बांग्ला’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की उम्मीदों और बेहतर भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
बता दें कि कोलकाता में शनिवार को आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु अधिकारी को गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। इस मौके पर भाजपा नेताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
सुवेंदु अधिकारी के साथ जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक शामिल हैं। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही राज्य में पहली बार किसी दक्षिणपंथी दल की सरकार बनी है।
8 मई को भाजपा विधायक दल ने सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करते हुए राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाया।
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वे तीन बार पार्षद रहे और कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी बने। उन्हें 20 साल से अधिक का विधायी अनुभव है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और पांच साल तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।

