चंडीगढ़, 31 जुलाई (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर नीट और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, दलितों पर लाठीचार्ज और वादाखिलाफी को लेकर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि मेरिट और पारदर्शिता का मुद्दा अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब में भी यह गंभीर रूप ले चुका है।
मजीठिया ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “देखिए, दो बहुत अहम और गंभीर मुद्दे हैं। जैसा कि आप जानते हैं, नीट और उससे भी बड़े स्तर पर पेपर लीक का मामला पूरे देश में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहा, और न ही यह राजनीति से जुड़ा है। यह मेरिट, पारदर्शिता और जवाबदेही का मामला है। सबसे काबिल उम्मीदवार यानी वह छात्र जो मेरिट के आधार पर अपनी जगह बनाता है, उसे ही नौकरी मिलनी चाहिए। जब सही पद के लिए सही व्यक्ति चुना जाता है, तो अंततः जनता को ही फायदा होता है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा, “दिल्ली जाकर अरविंद केजरीवाल ने कहा, लेकिन क्या पंजाब की असलियत किसी ने समझी है। मान सरकार ने झूठ बोला है कि पिछले 4.5 सालों में पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने इससे पहले 2023 में पेपर लीक पर एक पोस्ट किया था, ऐसे में वह राष्ट्रीय मीडिया के सामने झूठ कैसे बोल सकते हैं।”
मजीठिया ने पंजाब में हुई हाल की भर्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि पेपर लीक और नकल के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। 21 दिसंबर, 2025 को पंजाब ग्रुप ‘बी’ भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें लगभग एक लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। विजिलेंस ब्यूरो पेपर लीक और नकल के आरोपों की जांच कर रहा है। अब 2026 की फार्मेसी भर्ती परीक्षा को देखिए, जिसे लेकर अभी विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस परीक्षा में करीब 7,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ नकल का मामला था। लेकिन, नकल कैसे हुई? हर परीक्षा केंद्र पर सिर्फ 200-300 उम्मीदवार थे, फिर भी आरोप है कि ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करके प्रश्न-पत्र को बाहर भेजा गया, वहां उसे हल किया गया और जवाब वापस उम्मीदवारों को भेजे गए।”
उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई पारदर्शी है तो इन सभी मामलों की सीबीआई या हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और छात्रों का भरोसा बहाल हो।
अकाली नेता ने बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अकाली दल इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर भी उतरेगा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा। दलितों पर लाठीचार्ज एक गंभीर मामला है। नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स ने इस मामले का संज्ञान लिया है और पंजाब के डीजीपी को तलब किया है। सवाल यह है कि ऐसा क्यों हुआ? सफाई कर्मचारी अरविंद केजरीवाल को सिर्फ उन गारंटियों की याद दिला रहे थे जो उन्होंने दी थीं। उन्होंने वादा किया था कि अस्थायी कर्मचारियों को रेगुलर किया जाएगा और पक्की नौकरी दी जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब बरनाला में एक महिला शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही थी और अपने अधिकार मांग रही थी, तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा, “किसी पुरुष पुलिस कॉन्स्टेबल को उसके खिलाफ बल प्रयोग करने का कोई अधिकार नहीं था। एक डीएसपी महिलाओं के सिर पर लाठी मारते हुए क्यों दिखाई दिया? यह आप सरकार की असलियत है। जो लोग गारंटी देकर सत्ता में आए थे, आज वही लोग उनसे सवाल पूछने वालों पर लाठियां बरसा रहे हैं।”

