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पंजाब के सीएम भगवंत मान को एयरपोर्ट पर रोकना राजनीतिक दबाव की कोशिश : बलतेज पन्नू

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पटियाला, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के मीडिया सलाहकार बलतेज पन्नू ने मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद हवाई अड्डे पर तीन घंटे तक रोके जाने और 50 हजार रुपए के कस्टम जुर्माने का नोटिस दिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के कारण मुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।

पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री विदेश में पंजाब के उत्पादों को बढ़ावा देने और राज्य में निवेश लाने के उद्देश्य से गए थे, लेकिन उन्हें रोकने की कोशिश की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब के हितों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई, किसानों के मुआवजे और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अलग-अलग देशों की यात्रा के लिए कम से कम चार-पांच बार अनुमति मांगी थी। उनका उद्देश्य विदेश से पंजाब में निवेश और उद्योग लाना था, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े खाद्य महोत्सव में पंजाब के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री को जाना था। इसके लिए उन्हें अदालत से अनुमति लेनी पड़ी।

बलतेज पन्नू ने कहा कि विदेश में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कॉन्सुलेट जनरल को मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दौरे से वापसी के बाद मुख्यमंत्री को हवाई अड्डे पर करीब तीन घंटे तक बैठाकर रखा गया। इसके बाद उन्हें जाने दिया गया, लेकिन जब वह बाहर अपनी गाड़ी में बैठकर सामान रख चुके थे, तब उन्हें 50 हजार रुपए के कस्टम जुर्माने का नोटिस थमा दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई के पीछे दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है। केंद्र सरकार नहीं चाहती कि पंजाब में बाहर से निवेश आए या राज्य के कृषि उत्पाद दूसरे देशों में लोकप्रिय हों। मुख्यमंत्री राजमा और सफेद चने जैसे पंजाब के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए गए थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे और लोगों से मुलाकात को लेकर पन्नू ने कहा कि गृह मंत्री देश के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं और किसी से भी मिल सकते हैं। यदि वह किसी का दुख बांटने गए हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पन्नू ने 2007 से 2017 के बीच पंजाब में रही अकाली-भाजपा सरकार का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय नशे की समस्या बढ़ी, लेकिन भाजपा ने उसका प्रभावी विरोध नहीं किया।

उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाया और कहा कि विक्रम मजीठिया को बुलाए जाने से जुड़े मामले में जांच क्यों बंद की गई। उन्होंने केंद्र से इस बारे में जवाब देने की मांग की। भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की सड़क दुर्घटना में मौत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे पिछली बार पार्टी की रैली से लौट रहे थे, तब उनके परिवारों से मिलने के लिए अमित शाह नहीं गए। उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 700 से अधिक किसानों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या गृह मंत्री किसी एक किसान के परिवार से मिलने गए थे।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने प्रभावित किसानों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी दी है।

अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों के आधार पर पंजाब में नशे की स्थिति पर उठाए गए सवालों के जवाब में बलतेज पन्नू ने कहा कि गृह मंत्री को राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़ों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सीमा पार से आने वाली हेरोइन को रोकने के लिए काम कर रहा है। राज्य में पकड़ी गई हेरोइन की आपूर्ति केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह देश के दूसरे हिस्सों में भी पहुंच सकती थी। इसलिए पंजाब नशे के खिलाफ कार्रवाई करके पूरे देश की लड़ाई लड़ रहा है।

पन्नू ने कहा कि कितने लोग पकड़े गए और कितनी हेरोइन बरामद हुई, इसका पूरा ब्योरा गृह मंत्रालय के पास उपलब्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में एकजुटता की जरूरत वाले संदेश पर बलतेज पन्नू ने कहा कि इस समय भाजपा को एकजुट होने की जरूरत है, क्योंकि देश पहले से एकजुट है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर के जरिए लोगों के मताधिकार छीने जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर लोग एकजुट हो रहे हैं।

पन्नू ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का भी उल्लेख किया और दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा अलग-थलग पड़ रही है।