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यादों में गोंडवी : जिनकी गजलों में सुनाई देता था गरीबों का दर्द, सत्ता से सवाल पूछती थी कलम

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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य की दुनिया में कई ऐसे कवि हुए हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। हालांकि कुछ कवि ऐसे भी होते हैं, जिनकी कलम सिर्फ प्रेम, खूबसूरती और जिंदगी की भावनाओं तक सीमित नहीं रहती बल्कि समाज की कड़वी सच्चाइयों को भी सामने लाती है। अदम गोंडवी ऐसे ही कवियों में से एक थे। उन्होंने अपनी गजलों के जरिए गरीबों, मजदूरों, किसानों और समाज के वंचित लोगों की आवाज को बुलंद किया। उनकी रचनाओं में आम आदमी का दर्द भी था और व्यवस्था से सीधे सवाल करने का साहस भी।

अदम गोंडवी का जन्म 22 अक्टूबर 1947 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अट्टा परसपुर गांव में हुआ था। उनका असली नाम रामनाथ सिंह था लेकिन साहित्य की दुनिया में वह अदम गोंडवी के नाम से मशहूर हुए। गांव की मिट्टी, वहां के लोगों का संघर्ष और सामाजिक असमानता उनके जीवन और लेखन का अहम हिस्सा रहे।

अदम गोंडवी ने समाज को सिर्फ दूर से देखकर कविताएं नहीं लिखीं बल्कि आम लोगों के जीवन में मौजूद परेशानियों और संघर्षों को अपनी रचनाओं में जगह दी। उनकी गजलों में गांव की गरीबी, भूख, बेरोजगारी, जातिगत भेदभाव और राजनीतिक व्यवस्था की खामियां साफ नजर आती हैं। उनकी खासियत यह थी कि वह कठिन शब्दों के बजाय आम बोलचाल की भाषा में ऐसी बात कह जाते थे, जो सीधे दिल और दिमाग पर असर करती थी।

आमतौर पर गजल का नाम सुनते ही प्यार, मोहब्बत और खूबसूरत एहसासों का ख्याल आता है लेकिन अदम गोंडवी ने इस विधा को एक अलग पहचान दी। उन्होंने गजल के जरिए समाज के उन लोगों की परेशानियां सामने रखीं, जिनकी आवाज अक्सर बड़े मंचों तक नहीं पहुंच पाती थी।

अदम गोंडवी की प्रमुख कृतियों में ‘धरती की सतह पर’, ‘समय से मुठभेड़’ और ‘गर्म रोटी की महक’ शामिल हैं। हिंदी के साथ-साथ अवधी भाषा से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। उनकी रचनाओं में स्थानीय जीवन और आम लोगों की भाषा की सहजता दिखाई देती है। उनकी गजलों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं में आज भी उनकी पंक्तियां उद्धृत की जाती हैं।

साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 1998 में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें दुष्यंत कुमार पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें माटी रतन सम्मान से भी नवाजा गया। 18 दिसंबर 2011 को लखनऊ में अदम गोंडवी का निधन हो गया लेकिन उनकी रचनाएं आज भी लोगों को समाज की सच्चाई से रूबरू कराती हैं।