कोलकाता, 9 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बन रही है। सुवेंदु अधिकारी शनिवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की खुशी में पूर्व मिदनापुर के कोंटाई में त्योहार जैसा माहौल है। सुवेंदु अधिकारी के घर से पास लोगों की जबरदस्त भीड़ है। स्थानीय लोगों ने गर्व करते हुए कहा कि अब कोंटाई के साथ-साथ पूरे बंगाल का विकास होगा।
कोंटाई के निवासी ऋतिक दास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “पश्चिम बंगाल में जीत के बाद हमें उम्मीद थी कि सुवेंदु अधिकारी ही मुख्यमंत्री बनेंगे। शुक्रवार को दोपहर में जब उनके नाम की घोषणा की गई, हम लोग बहुत खुश हुए। हमने उन्हें छात्र राजनीति के समय से ही काफी करीब से देखा है। जिस कॉलेज से सुवेंदु अधिकारी ने पढ़ाई की, हम भी उसी कॉलेज में पढ़े हैं। वे अब मुख्यमंत्री बन रहे हैं तो यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।”
ऋतिक दास ने कहा, “सुवेंदु अधिकारी ने राजनीति में रहते हुए कोंटाई का काफी विकास कराया है। हमें विश्वास है कि अब कोंटाई की तस्वीर बदलेगी। साथ ही, पूरे पश्चिम बंगाल में विकास देखने को मिलेगा।”
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “35 साल वामपंथ का ‘जंगलराज’ खत्म होने के बाद ममता बनर्जी ने ‘दादागिरी’ का शासन चलाया। हालांकि, अब वह खत्म हो चुका है। हमें उम्मीद है कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में सुशासन का राज होगा और सुख, शांति व समृद्धि आएगी। महिला को सुरक्षा मिलेगी।”
वहीं, रविशंकर मंडल ने पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की कई खामियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार में स्कूलों की स्थिति बेहद खराब रही है। बहुत सारे स्कूल बंद हो चुके हैं। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुवेंदु अधिकारी जो कुछ कहते हैं, वे वो काम कराते हैं।
प्रणय मंडल नाम के एक व्यक्ति ने कहा, “सुवेंदु अधिकारी कोंटाई के भूमि पुत्र हैं, जो बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन रहे हैं। टीएमसी सरकार में राज्य के अंदर कुशासन की स्थिति रही है और महिलाएं असुरक्षित थीं, हम उम्मीद करते हैं कि सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद तस्वीर बदलेगी। वे राज्य को एक सही नेतृत्व देंगे, जिसमें नारी सुरक्षित रहेगी और विकास, रोजगार, निवेश को बढ़ावा मिलेगा।”
विश्वजीत चौधरी ने कहा, “सुवेंदु अधिकारी ने दो-दो बार मुख्यमंत्री को चुनाव हराया है। बंगाल में परिवर्तन का नाम ही अब सुवेंदु अधिकारी है। वे हमारे लिए एक राजनीतिक आदर्श बन चुके हैं।”

