Thursday, August 20, 2026
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तेलंगाना में रेलवे कनेक्टिविटी को लेकर सांसदों ने रखी मांग, केंद्र पर उपेक्षा का लगाया आरोप

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हैदराबाद, 20 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को लेकर सांसदों ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। सांसद वड्डी राजू ने भद्राचलम में रेलवे स्टेशन बनाने, कोठागुडेम-भद्राचलम रेल लाइन बिछाने और कोठागुडेम रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘भद्राद्री कोठागुडेम’ करने की मांग की।

वहीं, सांसद बलराम नाइक ने केंद्र सरकार पर तेलंगाना के रेलवे विकास की कथित उपेक्षा करने और रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जों को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।

सांसद वड्डी राजू ने बताया कि तेलंगाना के सांसदों के साथ रेलवे से जुड़े मुद्दों पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी समेत कई सांसद मौजूद रहे। बैठक में तेलंगाना के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट और यात्री सुविधाओं की मांगों को प्रमुखता से रखा गया। भद्राचलम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां भगवान श्रीराम का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इसके बावजूद भद्राचलम में सीधे रेलवे स्टेशन की सुविधा नहीं है।

उन्होंने कोठागुडेम से भद्राचलम तक नई रेल लाइन बिछाने और भद्राचलम को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि कोठागुडेम से भद्राचलम तक रेल लाइन बनाई जाती है तो यह क्षेत्र आगे जगदलपुर, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी जैसे इलाकों से जुड़ सकता है। इससे तेलंगाना के साथ-साथ आसपास के कई राज्यों के लिए रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। प्रस्तावित रेल नेटवर्क तेलंगाना को पांच राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्वाइंट के रूप में विकसित कर सकता है। इससे आदिवासी, दलित, पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि नई रेल लाइन से यात्रियों को लाभ मिलने के साथ-साथ माल ढुलाई में भी बड़ी सुविधा होगी। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मौजूद खनन क्षेत्रों से निकलने वाले आयरन ओर और अन्य खनिजों, जबकि तेलंगाना में सिंगरेनी कोल माइंस से जुड़े परिवहन को भी रेलवे नेटवर्क के जरिए अधिक सुगम बनाया जा सकता है। सांसद ने कोठागुडेम रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘भद्राद्री कोठागुडेम’ करने की मांग भी उठाई। सांसद का मानना है कि इससे जिले की पहचान और भद्राचलम के धार्मिक महत्व को रेलवे नेटवर्क में भी उचित स्थान मिल सकेगा। उन्होंने खम्मम के गांधी चौक पर रेलवे गेट बंद होने के बाद वहां तत्काल अंडरपास बनाने की मांग की।

राजू ने मल्लामडुगु रेलवे स्टेशन को जारी रखने और मधिरा रेलवे स्टेशन पर कुछ ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से पहले कई ट्रेनों का संचालन और ठहराव हो रहा था, लेकिन बाद में इनमें से कुछ सेवाएं बंद कर दी गईं। उन्होंने महबूबाबाद, केसामुद्रम और नेकोंडा में भी कुछ ट्रेनों के ठहराव की मांग की। उनका कहना है कि इन इलाकों के यात्रियों को लंबे समय से बेहतर ट्रेन कनेक्टिविटी की जरूरत है।

इसी बीच, सांसद बलराम नाइक ने केंद्र सरकार पर तेलंगाना के रेलवे विकास को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य को रेलवे के क्षेत्र में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है और नई ट्रेनों, रेल परियोजनाओं तथा इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में तेलंगाना की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने रेलवे की जमीन पर कथित कब्जों का मुद्दा भी उठाया। बलराम नाइक के मुताबिक, मलकाजगिरी समेत कई क्षेत्रों में रेलवे की जमीन पर कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने केंद्र से इस मामले में कार्रवाई की मांग की।

बलराम नाइक ने गरीब और निम्न आय वर्ग के यात्रियों के लिए पहले उपलब्ध ‘इज्जत पास’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले गरीब यात्रियों को कम कीमत पर रेल यात्रा की सुविधा देने के लिए पास व्यवस्था लागू थी, लेकिन बाद में इसे समाप्त कर दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से बच्चों और गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे जैसी बुनियादी सुविधा में आम आदमी को राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों और मध्यम वर्ग के हितों की अनदेखी की जा रही है।