चेन्नई, 30 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने आनंद शेखर को सुनाई गई मौत की सजा को मंजूरी दे दी है। अपराधी को 2023 में तिरुनेलवेली के मेलापालयम में तीन नाबालिग लड़कियों को धमकाने और एक के साथ उनका यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया गया था।
बेंच ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा में कानून को रीढ़ की हड्डी की तरह काम करना चाहिए। यह फैसला ऐसे अपराध करने वालों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए।”
जस्टिस आनंद वेंकटेश और जस्टिस केके रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने आगे कहा, “यह फैसला बदला लेने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि न्याय दिलाने और समाज की नैतिक व्यवस्था को बहाल करने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि जब अपराध बहुत गंभीर प्रकृति के हों तो जजों को न्याय की तलवार चलाने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।”
कोर्ट ने कहा, “एक सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा कैसे करता है। इस मामले में दोषी ने न केवल उनके शरीर के साथ हिंसा की, बल्कि जानबूझकर तीन मासूम बच्चियों पर क्रूरता भी की।”
बेंच ने कहा कि दोषी ने न केवल कानून को तोड़ा, बल्कि बच्चों की मासूमियत को भी खत्म कर दिया। यह अपराध अंतरात्मा को झकझोर देता है और न्याय की मांग करता है। ऐसे क्रूर मामले में दया दिखाना समाज के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा।
कोर्ट ने आगे कहा कि बच्चों की जिंदगी और भावनाओं को इतनी मामूली चीज समझने के बाद वह दोषी को अपनी बाकी जिंदगी जेल में शांति से बिताने की इजाजत नहीं दे सकता। मदुरै बेंच ने रजिस्ट्रार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी न्यायिक रिकॉर्ड, जिसमें ट्रायल कोर्ट का फैसला और अन्य दस्तावेज शामिल हैं, से पीड़ित बच्चों की पहचान हटा दी जाए।
बता दें कि 2023 में पलायमकोट्टई के ऑल वुमन पुलिस स्टेशन ने आनंद शेखर के खिलाफ तिरुनेलवेली के मेलापालयम में तीन नाबालिग लड़कियों को जान से मारने की धमकी देने और एक साथ उनका यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज किया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं, 12 मार्च को तिरुनेलवेली की स्पेशल पोस्टो कोर्ट ने आनंद शेखर को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने कानून के मुताबिक मौत की सजा की पुष्टि के लिए मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में पलायमकोट्टई के पुलिस इंस्पेक्टर के जरिए एक रेफरेंस दायर किया। फैसले के लिए मामला सुरक्षित रखने के बाद डिवीजन बेंच ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया और मौत की सजा की पुष्टि की।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “एक सभ्य समाज की पहचान कमजोर लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा से होती है। इस मामले में आरोपी ने न सिर्फ पीड़ितों के शरीर के साथ हिंसा की, बल्कि तीन मासूम बच्चों के साथ भी हिंसा की। उसने उन्हें जान से मारने की धमकी देने के बाद इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया।
उसने न सिर्फ कानून का उल्लंघन किया, बल्कि उनके बचपन की मासूमियत को भी खत्म कर दिया। ऐसा अपराध अंतरात्मा को झकझोर देता है। ऐसे बर्बर मामले में दया दिखाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। इन बच्चों की जिंदगी और भावनाओं के प्रति इतनी बेरुखी दिखाने के बाद, यह कोर्ट दोषी को जेल में शांति से अपनी बाकी जिंदगी बिताने की इजाजत नहीं दे सकता।”
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ‘सबसे दुर्लभ मामलों’ में मौत की सजा दी जा सकती है और माना कि यह मामला उसी श्रेणी में आता है। इसके अनुसार, हाई कोर्ट ने आनंद शेखर को दी गई मौत की सजा की पुष्टि की और रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि मामले का निपटारा करने से पहले केस के रिकॉर्ड से बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले सभी संदर्भ हटा दिए जाएं।

