नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गैर-भाजपा और गैर-एनडीए दलों को पत्र लिखा है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से संविधान और नागरिकों के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए मिलकर तत्काल कदम उठाने की अपील की है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्ष को एक साथ आकर आगे की रणनीति तय करनी चाहिए।
सीपीआई(एम) के मुताबिक, एमए बेबी ने यह पत्र 23 सितंबर को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के बाद लिखा है। पार्टी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और इसे लोकतंत्र तथा चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
बेबी पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को रोकने और इस पर सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श किए जाने की मांग भी की थी।
वाम दलों ने चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। एमए बेबी ने भी एक दिन पहले देशव्यापी विरोध कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा था कि विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए।
वाम दलों की मांग है कि मतदाता सूची से गलत तरीके से बाहर किए गए लोगों के मतदान अधिकार बहाल किए जाएं। इसके साथ ही चुनाव आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
पार्टियों ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का मुद्दा भी उठाया है। उनकी मांग है कि नियुक्ति की व्यवस्था प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली चयन समिति के आधार पर हो।
विपक्षी पार्टियों को लिखे पत्र में एमए बेबी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संविधान के मूल्यों और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा को लेकर चिंतित राजनीतिक दलों को बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने विपक्षी दलों के लिए आपसी सहमति से तारीख और स्थान तय कर बैठक करने का सुझाव दिया है। बेबी का कहना है कि देश की जनता राजनीतिक दलों से लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और वोट के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होने की उम्मीद कर रही है।
इससे पहले उन्होंने कहा था कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष को अन्य विकल्पों और आंदोलन पर विचार करना होगा। उन्होंने इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के स्तर पर फैसला लेने की बात भी कही थी।
चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि उसके आधिकारिक आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत पूरा कानूनी आधार प्राप्त है और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। आयोग के मुताबिक, किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय के मसौदे पर आंतरिक टिप्पणियां, सवाल और अलग-अलग विचार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
