Tuesday, July 21, 2026
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आईसेक्ट इंडिया के 40 वर्ष: गांवों तक शिक्षा, कौशल और तकनीक पहुंचाने की परिवर्तनकारी यात्रा

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भोपाल : 7 जुलाई/ भारत में शिक्षा और तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू हुई आईसेक्ट की चार दशक लंबी यात्रा अब ‘आईसेक्ट इंडिया’ के रूप में नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। वर्ष 1985 में वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार और चिंतक संतोष चौबे द्वारा स्थापित इस संस्था ने शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में लाखों युवाओं के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया है।

वर्ष 2026 में नई पहचान ‘आईसेक्ट इंडिया’ के साथ संस्था भविष्य उन्मुख शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल सशक्तीकरण के जरिए राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्प को और मजबूत कर रही है।

गांवों तक तकनीकी शिक्षा पहुंचाने का संकल्प

आईसेक्ट की स्थापना ऐसे समय में हुई, जब कंप्यूटर शिक्षा केवल बड़े शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी शिक्षा तक पहुंच बेहद कठिन थी।

इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए वर्ष 1986 में भोपाल में पहला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। संस्था ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें ही प्रशिक्षक बनाया, जिससे शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के अवसर भी विकसित हुए। यही मॉडल आगे चलकर ग्रामीण भारत में तकनीकी शिक्षा के विस्तार का आधार बना।

कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर

वर्ष 1995 आईसेक्ट की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। संस्था ने बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्रों की अवधारणा विकसित की, जहां शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक विकास को एक मंच पर लाया गया।

अधिकृत केंद्र मॉडल के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को संस्था से जोड़ा गया। इससे तकनीकी शिक्षा का विस्तार हुआ और विभिन्न क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए। जन-जागरूकता अभियानों ने ग्रामीण समाज में आधुनिक शिक्षा के प्रति विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ाई।

इसके बाद वर्ष 2003 में आईसेक्ट लिमिटेड की स्थापना के साथ संस्था ने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण को अधिक संगठित स्वरूप दिया।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत पहचान

तकनीकी प्रशिक्षण के बाद आईसेक्ट ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। संस्था का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को महानगरों से आगे बढ़ाकर राज्यों और क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाना था।

इसी क्रम में वर्ष 2005 में बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसके बाद 2010 में भोपाल में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, 2016 में झारखंड के हजारीबाग में आईसेक्ट विश्वविद्यालय, 2018 में बिहार के वैशाली और मध्यप्रदेश के खंडवा में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय स्थापित किए गए।

वर्ष 2023 में भोपाल में स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी (एसजीएसयू) की स्थापना के साथ कौशल आधारित उच्च शिक्षा को नई दिशा मिली। इन संस्थानों में उद्योग-उन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

डिजिटल भारत के साथ बढ़ते कदम

डिजिटल क्रांति के दौर में आईसेक्ट ने तकनीकी बदलावों को अपनाते हुए डिजिटल शिक्षा, ई-लर्निंग और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने का कार्य किया। इससे हजारों युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिला।

ग्रामीण भारत को बनाया विकास का केंद्र

चार दशकों की यात्रा में आईसेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि संस्था ने अपने विकास का केंद्र ग्रामीण भारत को बनाया। जहां अधिकांश शैक्षणिक पहलें बड़े शहरों तक सीमित रहीं, वहीं आईसेक्ट ने गांवों, छोटे कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों का मजबूत आधार तैयार किया।

स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाना, समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा को आत्मनिर्भरता से जोड़ना संस्था की कार्यशैली का प्रमुख आधार रहा है।

‘आईसेक्ट इंडिया’ के रूप में नई शुरुआत

वर्ष 2026 में ‘आईसेक्ट इंडिया’ नाम अपनाना संस्था के विकास का नया अध्याय माना जा रहा है। यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि भविष्य उन्मुख शिक्षा, डिजिटल सशक्तीकरण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की व्यापक सोच का प्रतीक है।

चार दशकों की यह यात्रा केवल एक शैक्षणिक संस्था की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की भी कहानी है जो शिक्षा, कौशल, तकनीक और नवाचार के सहारे आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।