पटना, 6 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार के बगहा की एक अदालत ने दहेज से जुड़े मामले में गर्भवती पत्नी की हत्या के आरोपी पति को दोषी करार दिया है, जबकि साक्ष्य के अभाव में उसकी सास को बरी कर दिया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को अपनी पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी पाया। अदालत ने सजा की अवधि और उसके निर्धारण पर दलीलें सुनने के लिए 20 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।
सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) मनु राव ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने बताया कि हत्या के समय संध्या गर्भवती थी और इस घटना में उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई थी।
राव ने कहा, “हत्या के समय पीड़िता गर्भवती थी। इस घटना में संध्या के साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई। अदालत ने इस मामले में उसके पति प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को दोषी पाया है।”
मामले के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना थाना क्षेत्र के अनरहवा नौका टोला निवासी गर्भन यादव ने अपनी 23 वर्षीय बेटी संध्या की शादी 5 जून 2025 को बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के पिपरासी थाना क्षेत्र के चनकुहवा गांव निवासी प्रमोद यादव से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कराई थी।
आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही दहेज की मांग को लेकर संध्या को उसके पति और ससुराल वालों की ओर से प्रताड़ित किया जाने लगा। बताया गया कि उसका पति मायके पहुंचा और अतिरिक्त दो लाख रुपये दहेज की मांग की।
मामले ने 11 सितंबर 2025 को उस समय गंभीर मोड़ ले लिया, जब सुबह करीब चार बजे संध्या के मायके वालों को सूचना मिली कि उसकी तबीयत खराब है। परिजन जब उसके ससुराल पहुंचे तो आरोप है कि वहां संध्या की हत्या की जा चुकी थी। घटना के बाद संध्या के पति, सास लीलावती देवी, देवर और ननद के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश कर हत्या में पति की संलिप्तता साबित करने का प्रयास किया। अदालत ने प्रमोद यादव को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और 91 के तहत दोषी ठहराया, जबकि शेष आरोपों से उसे बरी कर दिया। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उसकी सास लीलावती देवी को भी आरोपों से बरी कर दिया गया।
प्रमोद यादव फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। अदालत में 20 नवंबर को सजा की अवधि पर बहस होगी, जिसके बाद दोषी को दी जाने वाली सजा निर्धारित की जाएगी।
