नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने जयपुर में आयोजित संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन 2026 के दौरान महत्वपूर्ण सैन्य डोक्ट्रीन जारी किए है। इन सैन्य दस्तावेजों में ‘जॉइंट प्राइमर ऑन मैनड एंड अनमैनड टीमिंग’, ‘मिलिट्री साइबर स्पेस पॉलिसी’ व ‘बाईलिंगुअल जॉइंट स्टाफ सर्विसेज ड्यूटी पैम्फलेट’ शामिल हैं।
इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी और थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मौजूद रहे। इस मौके पर जनरल अनिल चौहान ने सैन्य कमांडरों से कहा कि ये दस्तावेज केवल प्रक्रियात्मक बदलाव नहीं हैं, बल्कि भारत की युद्धक रणनीति और सैन्य सोच में एक बुनियादी परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गौरतलब है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमता, स्वायत्त प्रणालियों तथा संयुक्त सैन्य संचालन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सिर्फ नए नियम या प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि भारत की युद्ध रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य की लड़ाइयों में इंसानों और अत्याधुनिक मशीनों को एक साथ काम करना होगा। एमयूएम-टी प्राइमर का उद्देश्य सैनिकों और स्वायत्त प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके तहत मानव निर्णय क्षमता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों की सटीकता के साथ जोड़ा जाएगा। इससे युद्ध के दौरान कार्रवाई अधिक तेज, प्रभावी और सुरक्षित बन सकेगी, साथ ही सैनिकों के जोखिम में भी कमी आएगी।
ये संयुक्त सैन्य नीतियां भविष्य के एकीकृत सैन्य ढांचे की मजबूत नींव बनेंगी। यह थिएटराइजेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसके तहत तीनों सेनाएं बेहतर समन्वय के साथ काम करेंगी।
मिलिट्री साइबर स्पेस पॉलिसी की बात करें तो साइबर स्पेस अब युद्ध का एक नया और अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। इस नीति का उद्देश्य सैन्य नेटवर्क, डिजिटल अवसंरचना और संवेदनशील रक्षा प्रणालियों की सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके माध्यम से साइबर खतरों की पहचान, रोकथाम और जवाबी कार्रवाई के लिए एकीकृत दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाएंगे।
वहीं, जॉइंट स्टाफ सर्विसेज ड्यूटी पैम्फलेट तीनों सेनाओं के अधिकारियों और कर्मियों के बीच संयुक्त कार्यप्रणाली को और अधिक सरल तथा प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त नीतियों का निर्माण भविष्य की एकीकृत सैन्य संरचनाओं की आधारशिला होगा और यह थिएटराइजेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जिनमें स्थल, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े होंगे। ऐसे में संयुक्तता, तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित निर्णय क्षमता भारत की सैन्य शक्ति के प्रमुख स्तंभ बनेंगे। 7 मई से भारत की तीनों सेनाओं यानी भारतीय वायुसेना, नौसेना व थलसेना के कमांडर्स का संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया है। यह सम्मेलन इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर यानी 7 मई को शुरू किया गया है।

