पॉक्सो केस में केंद्रीय मंत्री के बेटे बंदी भागीरथ ने किया स्वेच्छा से सरेंडर, वकील का दावा

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हैदराबाद, 17 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ के वकील ने रविवार को दावा किया कि उनके मुवक्किल को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि उन्होंने खुद स्वेच्छा से सरेंडर किया था।

मजिस्ट्रेट द्वारा भागीरथ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के कुछ घंटे बाद उनके वकील करुणा सागर ने कहा कि साइबराबाद पुलिस गलत तरीके से यह प्रचारित कर रही है कि बंदी भागीरथ को गिरफ्तार किया गया है।

वकील ने कहा, “असल में उन्होंने स्वेच्छा से एसओटी साइबराबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और कानून के अनुसार जांच में पूरा सहयोग किया। स्वेच्छा से पेश होने और सहयोग करने को ‘गिरफ्तारी’ के रूप में पेश करना भ्रामक है और इससे गलत सार्वजनिक धारणा बन रही है।”

उन्होंने मीडिया और आम जनता से अपील की कि स्वेच्छा से आत्मसमर्पण और हिरासत में गिरफ्तारी के बीच का अंतर समझें।

हालांकि, साइबराबाद पुलिस ने शनिवार देर रात जारी बयान में कहा कि भागीरथ को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

साइबराबाद पुलिस आयुक्त एम. रमेश ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर 8 मई को पेट बशीराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

पीड़िता के बयान के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(2)(एम) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(1) सहपठित धारा 6 जोड़ी गई।

पुलिस के अनुसार, विश्वसनीय सूचना के आधार पर साइबराबाद की एसओटी टीम ने 16 मई की रात करीब 8:15 बजे नरसिंगी थाना क्षेत्र के मंचिरेवुला स्थित टेक पार्क के पास भागीरथ को हिरासत में लिया और पेट बशीराबाद थाने ले गई।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। मेडिकल जांच के बाद उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि उनके बेटे को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि वह खुद पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि भागीरथ दो वकीलों की मौजूदगी में पेट बशीराबाद थाने पहुंचे थे।

यह घटनाक्रम तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा भागीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार किए जाने के एक दिन बाद सामने आया। न्यायमूर्ति टी. माधवी देवी ने पीड़िता का बयान देखने के बाद किसी भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

भागीरथ के खिलाफ नाबालिग लड़की से कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, आरोपी की ओर से करीमनगर में एक प्रतिशिकायत भी दर्ज कराई गई है, जिसमें लड़की के परिवार पर 5 करोड़ रुपये की उगाही की कोशिश का आरोप लगाया गया है।