कोलकाता, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन वेकेशन बेंच ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को एक मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि बाजार में अचानक 10 और 20 रुपए के स्टांप पेपर मिलने बंद हो गए हैं।
याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन वेकेशन बेंच के समक्ष आज दोपहर सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति मो. शब्बर रशीदी शामिल थे। सुनवाई के अंत में, बेंच ने राज्य सरकार को इस मामले में 20 नवंबर से पहले हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया।
बेंच ने वादी को 27 नवंबर से पहले एक हलफनामा जमा करने का भी निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को तय की गई है।
याचिका दायर करने वाले सुरजीत मंडल ने आरोप लगाया है कि पुलिस का इस्तेमाल करके अधिकृत विक्रेताओं से 25,000 से ज्यादा स्टांप पेपर लिए गए हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन स्टांप पेपरों को अलग-अलग पुलिस थानों में भेजा जा रहा था, जिसकी वजह से आम लोगों को स्टांप पेपर हासिल करने में परेशानी हो रही थी।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ ने बड़ी संख्या में स्टांप पेपर इकट्ठा किए हैं। साथ ही तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बयानों से जुड़े हलफनामों में इनका इस्तेमाल करने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस को प्रभावित किया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि रितब्रत बनर्जी के गुट में बहुत कम लोग होने के कारण, पुलिस घर-घर जाकर तृणमूल कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं से स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवा रही है। याचिका में बड़ी संख्या में स्टांप पेपर इकट्ठा करने की इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया गया है। दावा है कि स्टांप पेपर इकट्ठा करने और उनके इस्तेमाल के लिए विशेष कानून और पंजीकरण नियम मौजूद हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिस तरीके से स्टांप पेपर इकट्ठा किए जा रहे थे और इस्तेमाल किए जा रहे थे, उसमें उन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।”
याचिकाकर्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट से आग्रह किया कि वह पुलिस को इस प्रक्रिया को रोकने का आदेश दे। साथ ही, उन्होंने इस प्रक्रिया के जरिए पहले ही इकट्ठा किए गए स्टाम्प पेपर को जब्त करने के लिए भी कोर्ट से आदेश की मांग की।
मंगलवार दोपहर को हुई सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वह इस मामले में कोर्ट के सामने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करना चाहती है। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 20 नवंबर तक इस मामले में एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।
