नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज की ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करेगी। भारद्वाज को जंतर-मंतर पर एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में हिरासत में लिया गया है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के सामने भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने उठाया। उन्होंने कहा कि आरोपी पिछले तीन दिनों से हिरासत में है और उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी थी। हाई कोर्ट ने सोमवार को ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग मान ली।
याचिका के अनुसार, भारद्वाज की गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत गैर-कानूनी है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह याचिका दिल्ली की एक अदालत की ओर से भारद्वाज को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के एक दिन बाद दायर की गई है। इससे पहले, कथित मारपीट के मामले में उनकी एक दिन की पुलिस हिरासत पूरी हो चुकी थी। ड्यूटी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) अंजलि सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारद्वाज को अदालत में पेश किए जाने के बाद यह आदेश दिया।
दिल्ली पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें एक दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था। इससे पहले शनिवार को कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित जज के सामने पेश किए जाने के बाद भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।
स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों की ओर से दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने और उनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग करने के कुछ घंटों बाद की गई थी।
पुलिस के अनुसार, भारद्वाज पर जुलाई में जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि कुमार को लगी चोटें ‘मामूली’ थीं और वे स्टील के ब्रेसलेट के कारण लगी थीं। हालांकि, बाद में पुलिस ने कथित मारपीट के संबंध में दर्ज एफआईआर में एसी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी देने से जुड़ी धाराएं जोड़ दीं।
सीजेपी की ओर से हत्या के प्रयास का आरोप लगाने की भी मांग की गई थी, जिस पर पुलिस ने कहा कि विशेषज्ञ की मेडिकल राय लेने के बाद इस प्रावधान पर विचार किया जाएगा। नाबालिग एक्टिविस्ट की शिकायत पर भारद्वाज के खिलाफ ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (पॉक्सो) अधिनियम के तहत भी एक नई एफआईआर दर्ज की गई। एक्टिविस्ट ने ऑनलाइन दुष्कर्म की धमकी और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधान भी लागू किए गए हैं। इससे पहले, भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया था कि पुलिस रिमांड हासिल करने के लिए उन्होंने ‘पूरी तरह से तय कानूनी प्रक्रियाओं से हटकर काम किया’।
वकील उमेश शर्मा ने पत्रकारों से कहा, “कानून के मुताबिक, जब भी किसी को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर संबंधित इलाके के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी होता है। कल, हम संबंधित मजिस्ट्रेट के कोर्ट रूम के बाहर इंतजार करते रहे। जब पता चला कि पीठासीन जज छुट्टी पर हैं, तो हम तय लिंक मजिस्ट्रेट के पास गए।
उमेश शर्मा ने कहा, “हालांकि, पुलिस ने इसे दरकिनार करते हुए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक बिल्कुल अलग तय एससी/एसटी कोर्ट के सामने पेश किया और एक दिन की पुलिस रिमांड हासिल कर ली।”
बता दें कि यह विवाद एक कथित वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ था, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ मारपीट की थी और कथित तौर पर डींग मारी थी कि उन्हें ‘राजनीतिक संपर्कों’ की वजह से छोड़ दिया गया।
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी कहा था कि कथित वीडियो में भारद्वाज की ओर से उनके नाम का ‘गलत इस्तेमाल’ किया गया था। पासवान ने कहा कि उन्होंने भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और वह नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेंगे।
