नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने एक बड़े वीजा फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कनाडा भेजने और बिजनेस में निवेश कार्यक्रम के जरिए इमिग्रेशन दिलाने का झांसा देकर एक महिला से करीब 1.83 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक यह मामला कोविड-19 की पहली लहर के बाद का है। नौकरी और बेहतर भविष्य की तलाश में महिला कनाडा जाना चाहती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात धर्मिंदर शर्मा से हुई।
धर्मिंदर शर्मा ने खुद को एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म का डायरेक्टर (ऑपरेशंस) बताया और खुद को कनाडा इमिग्रेशन और विदेशी निवेश कार्यक्रमों का बड़ा विशेषज्ञ बताकर महिला का भरोसा जीत लिया।
आरोप है कि उसने महिला को कनाडा में बिजनेस निवेश योजना के नाम पर सीएडी (कैनेडियन डॉलर) 2,50,000 निवेश करने के लिए तैयार किया। इसके अलावा प्रोफेशनल फीस के तौर पर सीएडी 45,000 भी लिए। इस तरह आरोपी ने कुल सीएडी 2,95,000 यानी करीब 1.83 करोड़ रुपये हासिल कर लिए।
आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया था कि इस निवेश के जरिए उसे कनाडा का इमिग्रेशन, वर्क परमिट और बिजनेस ओनरशिप के अधिकार मिल जाएंगे।
महिला का विश्वास जीतने के लिए आरोपी ने कुछ ऐसे दस्तावेज भी तैयार किए, जिनमें दिखाया गया कि महिला कनाडा की एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी में डायरेक्टर या शेयरहोल्डर बनने वाली है। हालांकि जांच में सामने आया कि महिला को कभी भी कंपनी में शेयरहोल्डर या डायरेक्टर नहीं बनाया गया। कंपनी की मालिकाना हक दूसरे लोगों के पास ही रहा।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि विदेशी बैंक खातों में पैसा आने के बाद आरोपी ने रकम को बिजनेस में लगाने के बजाय कैश निकासी, डेबिट ट्रांजैक्शन और कई खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया।
सबसे अहम बात यह रही कि कनाडाई अधिकारियों द्वारा महिला के वीजा आवेदन कई बार खारिज किए जाने के बाद भी आरोपी उसे लगातार झूठे आश्वासन देता रहा। वह कभी री-कंसिडरेशन की बात करता तो कभी प्रक्रिया लंबी खींचता रहा ताकि पैसे वापस न करने पड़ें।
जांच में यह भी सामने आया कि महिला का नाम कभी भी कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया था।
पंजाब के डेराबस्सी निवासी धर्मिंदर शर्मा एमबीए है और खुद को कनाडा आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम का बड़ा सलाहकार बताता था। पुलिस ने उसके पास से एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसमें ईमेल, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, इमिग्रेशन दस्तावेज, सोशल मीडिया चैट और कई अहम डिजिटल सबूत मिलने की संभावना है।

