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पूर्व आयकर अधिकारी को 40,000 रुपए रिश्वत मामले में पांच साल की कैद

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औरंगाबाद, 30 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने एक दशक पुराने भ्रष्टाचार मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पूर्व आयकर अधिकारी सतीश कुमार भदानी को दोषी ठहराया है। उन्हें एक करदाता से रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीबीआई ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।

अदालत ने 29 सितंबर, 2026 को पूर्व अधिकारी पर 1.5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। अपराध के समय भदानी महाराष्ट्र के जलगांव स्थित आयकर कार्यालय में वार्ड 2(2) के आयकर अधिकारी के पद पर कार्यरत थे।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार, जलगांव जिले के एक करदाता द्वारा दायर लिखित शिकायत के बाद 23 सितंबर, 2016 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आयकर विभाग द्वारा उनके और उनकी पत्नी दोनों के आयकर रिटर्न की गहन जांच के लिए चयन किया गया था।

शिकायत में आगे कहा गया कि आरोपी अधिकारी ने रिटर्न की गहन जांच न करने और अनुकूल मूल्यांकन आदेश जारी करने के बदले करदाता से अनुचित लाभ की मांग की।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने जांच शुरू की और आरोपों की पुष्टि के लिए जाल बिछाया। इस ऑपरेशन के दौरान, सीबीआई अधिकारियों ने भदानी को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 40,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। सफल जाल बिछाने के परिणामस्वरूप उनकी गिरफ्तारी हुई और औपचारिक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

जांच के बाद, सीबीआई ने 28 दिसंबर, 2016 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया कई वर्षों तक चली और अदालत ने 20 दिसंबर, 2021 को औपचारिक रूप से आरोप तय किए।

सबूतों की जांच और मुकदमे के दौरान प्रस्तुत दलीलों को सुनने के बाद, सीबीआई अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों का दोषी पाया।

अदालत ने बाद में पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और आर्थिक जुर्माना भी लगाया।

इस सजा को भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों द्वारा सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग को रोकने के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

यह मामला निजी लाभ के लिए अपने अधिकार का दुरुपयोग करने वाले लोक सेवकों को भुगतने वाले कानूनी परिणामों को रेखांकित करता है और भ्रष्टाचार की शिकायतों के निवारण में जांच एजेंसियों की भूमिका को उजागर करता है।

सीबीआई ने इस फैसले का स्वागत किया है, जिसके साथ शिकायत दर्ज होने के लगभग 10 वर्षों बाद लंबे समय से लंबित यह मामला समाप्त हो गया है।