तमिलनाडु : डीएमके-एआईएडीएमके में गठबंधन के लिए वामपंथी दल और वीसीके अहम

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चेन्नई, 7 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु में तेजी से विकसित हो रहे राजनीतिक घटनाक्रम में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीआई-एम), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इनके समर्थन से ही यह तय होने की संभावना है कि अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) अगली सरकार बना पाएगी या डीएमके और एआईएडीएमके समर्थित कोई वैकल्पिक गठबंधन अस्तित्व में आएगा।

विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच डीएमके अध्यक्ष और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को चेन्नई में सेनोटैफ रोड स्थित अपने आवास पर सीपीआई-एम के राज्य सचिव पी. शनमुगम, सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन और वीसीके अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन के साथ चर्चा की।

सूत्रों के अनुसार, स्टालिन ने डीएमके द्वारा एआईएडीएमके को समर्थन देने की संभावना पर चर्चा की, ताकि सरकार के गठन में सुविधा हो और राज्य में लंबे समय तक चलने वाली राजनीतिक अस्थिरता को रोका जा सके।

इन चर्चाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि तमिलनाडु विधानसभा के 234 सदस्यों में से किसी भी पार्टी या गठबंधन को अभी तक बहुमत का आवश्यक आंकड़ा यानी 118 सीटें हासिल नहीं हो पाई हैं।

तीनों दलों के मिलाकर छह विधायक हैं, जिससे मौजूदा राजनीतिक समीकरण में उनका रुख महत्वपूर्ण हो जाता है। सूत्रों के अनुसार, सीपीआई-एम और सीपीआई के नेताओं ने स्टालिन को सूचित किया कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनकी संबंधित राज्य समितियां शुक्रवार को होने वाली बैठकों में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेंगी।

वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी मोटे दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा अपनाए गए रुख का अनुसरण करेगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि वामपंथी दल और वीसीके तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता के साथ-साथ वैचारिक विचारों को संतुलित करने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि खंडित जनादेश ने राज्य की राजनीति में अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है।

इस बीच, गुरुवार की शाम को होने वाली डीएमके विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है, जिसमें स्टालिन को एआईएडीएमके द्वारा सरकार गठन के लिए समर्थन मांगने वाले किसी भी अनुरोध पर उचित निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

डीएमके के सूत्रों ने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल प्रशासन में औपचारिक रूप से शामिल होने के बजाय एआईएडीएमके के नेतृत्व वाली सरकार को बाहरी समर्थन देने की ओर झुका हुआ है।

हालांकि, गठबंधन के साझेदारों को यह तय करने की स्वतंत्रता दी जा सकती है कि वे इस तरह की गठबंधन व्यवस्था में भाग लेना चाहते हैं या नहीं।