नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज 2020 के एक मर्डर केस के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी लगभग छह वर्ष से फरार था और गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार अपनी जगह बदल रहा था।
आरोपी की पहचान 35 वर्षीय मो. शेख शब्बीर के तौर पर हुई है। उसे 25 सितंबर को कंझावला से ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत गिरफ्तार किया गया।
यह ऑपरेशन दिल्ली पुलिस ने गंभीर अपराधों में शामिल और लंबे समय से फरार चल रहे खतरनाक अपराधियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए शुरू किया है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, एनआर-1 के इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान की टीम हत्या और डकैती के मामलों में फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी।
ऑपरेशन के दौरान, कॉन्स्टेबल अंकुश को शब्बीर के ठिकाने के बारे में खास जानकारी मिली और पता चला कि वह कंझावला गांव में छिपा हुआ था।
इसके बाद फील्ड वेरिफिकेशन और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए जानकारी की पुष्टि की गई। एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज ठाकरान के नेतृत्व में एक रेडिंग टीम बनाई गई, जिसमें एसआई भाग्यश्री, एएसआई अनिल, एएसआई सुमित, एएसआई अजय और कॉन्स्टेबल अंकुश शामिल थे।
शुक्रवार को टीम ने कंझावला इलाके में एक समन्वित छापेमारी की और शब्बीर को सफलतापूर्वक पकड़ लिया, जो लगभग छह वर्ष से गिरफ्तारी से बच रहा था।
आरोपी 35 वर्षीय सिराज अली की हत्या के मामले में वांछित था, जो 29 अप्रैल 2020 को जहांगीरपुरी में झुग्गी नंबर जी-636 स्थित अपनी मीट की दुकान पर काम कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, सिराज अली और शेख जहूर के बेटे शाह आलम के बीच मीट की कीमत को लेकर बहस हुई थी। यह विवाद मारपीट में बदल गया। शाह आलम ने अपने साथियों मो. शेख शब्बीर, सिराज, सलीम, जहूर और शकील के साथ मिलकर कथित तौर पर लोहे की रॉड और लकड़ी के डंडों से सिराज अली पर हमला किया।
पीड़ित को गंभीर चोटें आईं और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद, जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 323 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
जांच के दौरान जहां अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, वहीं शब्बीर गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहा और फरार रहा। पुलिस ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए वह अक्सर अपनी रहने की जगह बदलता रहता था।
