केरल : कासरगोड में बाल विवाह के संदिग्ध मामले में कोर्ट ने दिए जांच के आदेश, चार लोगों पर केस दर्ज

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कासरगोड, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। कासरगोड के त्रिक्करिपुर में कथित बाल विवाह के मामले में अदालत के निर्देश पर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में दूल्हे और एक स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि सहित चार लोगों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

होसदुरग की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के अनुसार, चंदेरा पुलिस ने बाल विवाह निषेध अधिकारी की रिपोर्ट के बाद मामला दर्ज किया। अधिकारी को प्रथम दृष्टया सबूत मिले थे कि 13 अप्रैल को कासरगोड जिले की एक स्थानीय जुमा मस्जिद में 16 साल की एक लड़की की शादी 28 साल के एक प्रवासी युवक से की गई थी।

जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें ‘दूल्हा’ (पडन्ना का रहने वाला 28 साल का युवक, जो अभी दक्षिण कोरिया में काम करता है), लड़की का पिता (जिस पर आरोप है कि उसने शादी की रस्में पूरी करवाईं), स्थानीय निकाय का एक सदस्य और मस्जिद का सचिव शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच चल रही है।

चाइल्डलाइन को इस घटना के बारे में जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। जांच के निष्कर्ष अदालत के सामने पेश किए गए, जिसके बाद अदालत ने पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इस बीच, लड़की और दूल्हे के रिश्तेदारों ने इस बात से इनकार किया है कि कोई शादी हुई थी। उनका कहना है कि वह कार्यक्रम केवल सगाई की रस्म थी।

इस बीच, पुलिस कार्यक्रम के वीडियो फुटेज सहित दस्तावेजी और डिजिटल सबूत इकट्ठा करने के लिए जांच को आगे बढ़ा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह कार्यक्रम असल में किस तरह का था।

इसके अलावा, एक अन्य व्यक्ति ने मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर मांग की है कि एक उच्च-स्तरीय पुलिस टीम द्वारा इस मामले की विस्तृत जांच की जाए।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि माना जा रहा है कि दूल्हा दक्षिण कोरिया लौट चुका है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि भारतीय कानून के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है और चल रही जांच का मुख्य उद्देश्य पुख्ता सबूतों के आधार पर तथ्यों को स्थापित करना होगा।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब केरल सरकार और मध्य प्रदेश सरकार नई दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष एक कानूनी पचड़े में उलझी हुई हैं। दोनों सरकारें उस शादी की वैधता का पुरजोर बचाव कर रही हैं, जिसमें कुंभ मेला में वायरल हुई लड़की शामिल है।

जहां एक ओर केरल पुलिस का कहना है कि प्रक्रिया में कोई चूक नहीं हुई है और शादी कानूनी रूप से वैध है (उनका दावा है कि 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के पूवर स्थित एक मंदिर में हुई शादी के समय लड़की 18 साल की हो चुकी थी), वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश पुलिस और लड़की के परिवार का कहना है कि लड़की अभी नाबालिग है।