नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोपी 20 वर्षीय युवक को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी और 14 वर्षीय पीड़िता के बीच प्रेम संबंध तथा पीड़िता का शुरुआती बयान जमानत देने के पक्ष में महत्वपूर्ण परिस्थितियां हैं। बयान में उसने कहा था कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी और उसे किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज आरोपी और पीड़िता के बीच घनिष्ठ और प्रेमपूर्ण संबंध दर्शाते हैं। पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर दोनों की तस्वीरें भी साझा की थीं और आरोपी के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया था।
अदालत ने कहा, “न तो आरोपी की कम उम्र और न ही पीड़िता की कम उम्र को नजरअंदाज किया जा सकता है। रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज दोनों के बीच घनिष्ठ और प्रेम संबंध को दर्शाते हैं। इसके अलावा, अपने शुरुआती बयान में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपनी इच्छा से घर से गई थी और उसे किसी के खिलाफ शिकायत नहीं है। इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और ये जमानत देने के पक्ष में जाने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।”
अदालत आरोपी विक्की की तीसरी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वह जुलाई 2023 में अमन विहार थाने में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है।
मामले की शुरुआत पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी नाबालिग बेटी 28 जुलाई 2023 को स्कूल जाने के बाद घर नहीं लौटी। बाद में 30 जुलाई को उसे तलाश कर पुलिस थाने लाया गया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस थाने में काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने बताया था कि मां की डांट से नाराज होकर वह घर से निकल गई थी और अपनी मासी के घर चली गई थी। उसने यह भी कहा था कि उसे किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है और किसी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया।
हालांकि, बाद में पीड़िता ने एक अन्य बयान में आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध रखा और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद एफआईआर में यौन अपराध और पॉक्सो अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं।
अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 8 महीने थी, जबकि आरोपी की उम्र 20 वर्ष 4 महीने थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि घटना से पहले दोनों कई महीनों से संबंध में थे और पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर आरोपी की कई तस्वीरें पोस्ट की थीं, जिनमें दोनों की करीबी तस्वीरें भी शामिल थीं।
हाई कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए थे।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि दोनों करीब आठ से नौ महीने से प्रेम संबंध में थे और उनका रिश्ता सार्वजनिक था तथा अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी थी।
वकील ने यह भी कहा कि आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह दिल्ली का स्थायी निवासी है और उसके पास पासपोर्ट भी नहीं है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला एक नाबालिग से जुड़ा गंभीर अपराध है और पॉक्सो अधिनियम के मामलों में सहमति का कोई महत्व नहीं होता।
शिकायतकर्ता के वकील ने भी जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि पीड़िता ने बाद में यौन उत्पीड़न के स्पष्ट आरोप लगाए थे तथा अभियोजन के गवाहों ने भी एक-दूसरे के बयानों की पुष्टि की है।
हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहले ही तीन वर्ष से अधिक समय न्यायिक हिरासत में बिता चुका है और मुकदमे के पूरा होने में अभी समय लग सकता है। अदालत ने कहा कि मामले में 19 अभियोजन गवाह हैं, जिनमें से अब तक केवल पीड़िता और उसके पिता की ही गवाही हुई है।
अदालत ने फोरेंसिक साक्ष्यों पर भी ध्यान दिया। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, घटना स्थल से बरामद कंबल से मिले मिश्रित डीएनए प्रोफाइल में आरोपी और पीड़िता दोनों का डीएनए पाया गया।
हालांकि, पीड़िता के सर्वाइकल स्वैब और स्मीयर से किसी पुरुष का डीएनए प्रोफाइल प्राप्त नहीं हुआ।
न्यायमूर्ति पुष्करणा ने अपने एक पुराने फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें पॉक्सो मामले में जमानत पर विचार करते समय आरोपी और पीड़िता की उम्र, उनके संबंध, बयानों में विरोधाभास और वास्तविक परिस्थितियों जैसे कारकों को महत्व दिया गया था।
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए।
हाई कोर्ट ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह हर सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होगा और जांच अधिकारी को अपना स्थायी तथा वर्तमान पता उपलब्ध कराएगा। उसे अपना मोबाइल नंबर भी चालू रखना होगा और प्रत्येक सोमवार सुबह 9 बजे संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगानी होगी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी किसी भी गवाह या मामले से जुड़े व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित, धमकाने या कोई लालच देने की कोशिश नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके ये सभी अवलोकन केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए हैं। इनका मुकदमे की सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इन्हें मामले के गुण-दोष पर अदालत की राय नहीं माना जाएगा।
