नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने न्यूयॉर्क में भारत के वाणिज्य दूतावास में आयोजित ‘ग्राउंडिंग द फ्रंटियर: ए ग्लोबल साउथ एआई फ्रेमवर्क’ विषय पर चर्चा के दौरान ग्लोबल साउथ के लिए एआई और डिजिटल हेल्थ इनोवेशन में भारत के अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत यह दिखा रहा है कि कैसे मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और संदर्भ-आधारित डेटा से चलने वाली एआई बड़े पैमाने पर हेल्थकेयर सर्विस को बदल सकती है।
यह सत्र मेरिडियन इंटरनेशनल सेंटर और प्राइमस पार्टनर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल के साथ बातचीत हुई और इसका संचालन प्राइमस पार्टनर्स के सीईओ और संस्थापक निलय वर्मा ने किया।
अपने संबोधन में स्वास्थ्य सचिव ने भारत की हेल्थ-टेक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधार के जरिए बनाए गए डिजिटल आधार और बाद में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और एबएचए आईडी के जरिए मजबूत किए गए सिस्टम ने भारत को एक ऐसा डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम बनाने में सक्षम बनाया है, जिसे बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है और जो अलग-अलग सिस्टम के साथ मिलकर काम कर सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई मॉडल को संदर्भ-आधारित और प्रतिनिधि डेटा से सीखना चाहिए ताकि वे ऐसे समाधान दे सकें जो उन लोगों के लिए सार्थक और प्रासंगिक हों जिनकी वे सेवा करते हैं।
श्रीवास्तव ने हेल्थकेयर में एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर भी बात की, जिसमें एआई-सक्षम क्लिनिकल निर्णय सहायता, लंबे समय के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण और बीमारी के हॉटस्पॉट की पहचान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तकनीक केवल इनोवेशन तक सीमित न रहकर वास्तविक दुनिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को जिम्मेदारी और प्रभावी ढंग से अपनाने के लिए ‘हेल्थकेयर में एआई के लिए रणनीति’ (एसएएचआई) को एक गाइडबुक के तौर पर रेखांकित किया और तकनीक-आधारित समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने के भारत के अनुभव पर जोर दिया।
इस चर्चा में इस बात पर भी मंथन किया गया कि एआई किस तरह ग्लोबल साउथ में हेल्थकेयर और विकास के नतीजों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) की दिशा में प्रगति को तेज करना भी शामिल है।
इस सेशन में एआई कंपनियों, मल्टीलेटरल संगठनों, अमेरिकी नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और ऐसे एआई इकोसिस्टम बनाने पर चर्चा की जो समावेशी, जिम्मेदार और ग्लोबल साउथ की जरूरतों के हिसाब से हो।
