सोमनाथ भारत की अमर सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक, पीएम मोदी की यात्रा पर अयोध्या में उत्साह

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अयोध्या, 8 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 मई को सोमनाथ मंदिर पहुंचने और वहां विशेष अनुष्ठान में शामिल होंगे। उन्होंने सोमनाथ के ‘विध्वंस से सृजन’ तक के सफर के बारे एक लेख भी लिखा। इसी क्रम में अयोध्या के संतों, धर्माचार्यों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।

अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक वर्गों ने सोमनाथ मंदिर को भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण करार दिया है।

अयोध्या नगर निगम के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की अक्षुण्ण सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इस मंदिर में ऐसी जिजीविषा और आध्यात्मिक शक्ति है, जिसे कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।

हजारों वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर का विध्वंस हुआ था और अब उस ऐतिहासिक घटना के एक हजार वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को वहां विशेष अनुष्ठान में शामिल होंगे।

गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल भारत का प्रथम ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का उद्घोष भी है। जिन संस्कृतियों और परंपराओं के अनुयायियों में उन्हें पुनर्जीवित करने की अदम्य इच्छाशक्ति होती है, उन्हें कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। समय के साथ वे कमजोर अवश्य दिखाई दे सकती हैं, लेकिन समाप्त नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर आज इसी अमर सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर खड़ा है। अयोध्या निवासी होने के नाते उन्होंने इसे गौरव और सौभाग्य का विषय बताया।

अयोध्या के सामाजिक कार्यकर्ता नितिन मिश्रा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों तक सनातन आस्था का यह केंद्र यूं ही नहीं खड़ा रहा, बल्कि इसके पीछे लंबा संघर्ष और अनेक बलिदान जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार आक्रमण हुए, लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ मंदिर की पहचान और महत्व कायम रहा।

नितिन मिश्रा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर और राम मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सनातन परंपरा की निरंतरता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत यह दर्शाती है कि सनातन संस्कृति अत्यंत समृद्ध और मजबूत है, जिसे किसी भी प्रयास से मिटाया नहीं जा सकता।

वहीं जगत गुरु परमहंसचार्य तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने कहा कि मुगलकाल में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर जो आघात हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उन्हें पुनः प्रतिष्ठित करने का कार्य कर रहे हैं। सोमनाथ मंदिर भारत की आत्मा और भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्‍होंने कहा कि तलवारों के बल पर भारत की संस्कृति को समाप्त करने की अनेक कोशिशें हुईं, लेकिन ऐसा प्रयास करने वाले स्वयं इतिहास से मिट गए, जबकि सनातन संस्कृति आज भी जीवित और सशक्त है।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर प्रत्येक भारतीय के हृदय में बसता है और प्रधानमंत्री मोदी सभी भारतीयों तथा सनातन धर्मावलंबियों के प्रतिनिधि के रूप में वहां जा रहे हैं।

परमहंसाचार्य ने कहा कि देशभर के संत समाज और सनातन अनुयायी प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े हैं और सोमनाथ मंदिर भारतीय सांस्कृतिक गौरव का शाश्वत प्रतीक बना रहेगा।