पटना, 8 मई (आईएएनएस)। बिहार के जमुई में भ्रष्टाचार विरोधी एक बड़े अभियान में सतर्कता जांच ब्यूरो (वीआईबी) ने शुक्रवार को सोनो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक क्लर्क को 37,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
आरोपी रूपेश कुमार पर एक ऑग्जिलरी नर्स मिडवाइफ (एएनएम) से बकाया वेतन का भुगतान करने के बदले में पैसे मांगने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित एएनएम राजनंदिनी को लगभग 11 महीनों से बकाया वेतन नहीं मिला था।
उन्होंने आरोप लगाया कि क्लर्क ने बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने और जारी करने के लिए रिश्वत के तौर पर एक महीने के वेतन के बराबर राशि की मांग की।
राजनंदिनी ने बताया कि फरवरी 2025 से अवैध भुगतान की मांगें लगातार जारी थीं।
शिकायत मिलने के बाद, सतर्कता विभाग ने आरोप की प्रारंभिक जांच की और उसे सत्य पाया।
जांच के आधार पर, अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज की और जाल बिछाया।
सतर्कता दल ने रूपेश कुमार को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 37,000 रुपए नकद लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
एएनएम ने आरोप लगाया कि वेतन भुगतान में देरी के कारण वह गंभीर आर्थिक संकट में थी।
उसके बयान के अनुसार, उसे आरोपी द्वारा मांगी गई रिश्वत चुकाने के लिए अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ी।
उसने 23 मार्च को सतर्कता विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
राजनंदिनी ने आगे आरोप लगाया कि स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की भ्रष्ट गतिविधियां खुलेआम चल रही थीं।
उन्होंने दावा किया कि ये गतिविधियां पीएचसी प्रभारी शशि भूषण की जानकारी में हो रही थीं।
एएनएम ने यह भी आरोप लगाया कि कई अन्य महिला कर्मचारियों को पहले भी लगभग 6,000 रुपए की रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन उन्होंने डर और दबाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराई।
सतर्कता जांच ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि कार्रवाई से पहले आरोपों की पुष्टि की गई थी।
डीएसपी ने बताया कि पीड़ित एएनएम राजनंदिनी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और आरोपों की पुष्टि की गई। जांच में मामले की सत्यता की पुष्टि होने के बाद, उसे शुक्रवार को 37,000 रुपए नकद के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले की आगे की जांच फिलहाल जारी है।

